सावधान ! लखनऊ में घूम रहा है Leopard

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लखनऊ। राजधानी के मड़ियाव क्षेत्र में मिले पैर के निशान बाघ के नहीं बल्कि तेंदुए के निकले हैं। तेंदुआ लखनऊ की सीमा में ही है। इस बात की पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने भी कर दी है। किसी भी अनहोनी को रोकने के मकसद से वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

सोमवार दोपहर तेंदुए को पकड़ने के लिए आईआईएम रोड पर सहारा सिटी होम्स व उर्दू अरबी विश्वविद्यालय के पास स्थित जंगल में वन विभाग ने पिंजड़ा भी लगाया। यह इलाका आईआईएम के निकट है और शहरी सीमा से सटा है। पैर के निशानों की संख्या के मुताबिक तेंदुए की मौजूदगी इसी क्षेत्र में बताई जा रही है। तेंदुए की पुष्टि होते वन विभाग में हड़कंप मच गया है।

वन कर्मियों को दिए गए निर्देश

तेंदुए के पैर के निशान मिलने के बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी एसपी सिंह से डीएफओ ने पूरा ब्योरा मांगा है। डीएफओ अवध प्रभाग श्रद्धा यादव ने वन कर्मियों को कई निर्देश देने के साथ ही तेंदुए को पकड़ने के लिए किए गए इंतजामों का निरीक्षण किया। पिंजड़े की मजबूती, उसमें मौजूद बकरी तथा तेंदुए के फंसने की स्थिति में एहतियात संबंधी निर्देश दिए। 10 दिसंबर को इस इलाके में बाघ की मौजूदगी की खबर आई थी लेकिन बाद में वन विभाग ने कहा था कि वह बाघ नहीं है। अब तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। कॉम्बिंग के दौरान पकड़े जाने पर तेंदुए को बेहोश करने के भी इंतजाम हैं। डाक्टर व दवाइयों के भी इंतजाम किए गए हैं।

घरों में कैद हुए लोग

तेंदुए के मिलने की खबर जैसे ही इलाकों में दहशत का माहैल हो गया। लोग शाम होते ही अपने-अपने घरों में कैद हो जा रहे हैं। वहीं कुछ इलाकों में लोगों ने तेंदुए के डर से घरों के बाहर से निकलना बंद कर दिया है।

कब-कब रहा बाघ का खौफ

1- 2009 में चिड़ियाघर में मौजूद बाघ किशन ने काफी आतंक मचाया। पांच लोगों को किशनपुर में मारने के बाद किशन पकड़ा गया। वह भी एक औरत की बहादुरी से।

2- 2012 में रहमानखेड़ा में चार साल का बाघ पकड़ा गया। इसने कई लोगों पर हमला किया था। यह बाद में जंगल में छोड़ दिया गया।

3- 2014 में मैलानी खीरी में बाघिन देखी गई। वन विभाग की टीम ने पीछा किया। लेकिन बाघिन टीम को धोखा देने में कामयाब हुई, उसके बाद कभी नहीं दिखी।

4- 2015 में सीतापुर के नीमसार में कई बार बाघ दिखा। लेकिन इसने अभी तक किसी पर हमला नहीं किया। साथ ही इसे पकड़ा भी नहीं जा सका है।

तेंदुए ने भी पहले मचाया है आतंक

1- 2011 में काफी दिनों तक आतंक फैलाने के बाद मलिहाबाद, गोरखपुर व मथुरा में एक-एक तेंदुए पकड़े गए।

2- 2012 प्रतापगढ़ और मलिहाबाद से एक-एक तेंदुआ पकड़ा गया।

3- 2013 पीजीआई के रानीखेड़ा से एक तेंदुआ, मॉल व बलरामपुर में भी एक तेंदुआ पकड़ा गया।

4- 2014 सीतापुर के कुरैया उदयपुर गांव व सिधौली से भी एक तेंदुआ पकड़ा गया। मड़ियांव में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। तेंदुए को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।

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