विदेश में लाखों की नौकरी छोड़कर सेना में लेफ्टिनेंट बनी ये लड़की

जो लड़की जापान की एक बड़ी कम्पनी में इंजीनियर के पद पर तैनात होने के बावजूद उसे देश के लिए कुछ करने का जज्बा हमेशा कचोटता रहा। इस लड़की ने एसएसबी की परीक्षा दी और तीसरे चांस में फतह हासिल कर ली। आज वह इंजीनियर से लेफ्टिनेंट बन गई और देश सेवा का सपना पूरा किया।

ये देशभक्त महिला रोहतक की रहने वाली वृत्ति शर्मा हैं जो जो चेन्नई की ऑफिसर ट्रैनिंग एकेडमी से पास आऊट हुई। उन्हें ओटीए का सिल्वर मैडल अवार्ड मिला। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वृत्ति को जम्मू के कुपवाडा में पोस्टिंग मिली। रोहतक में पली-बढी वृत्ति मूलरूप से झज्जर के बेरी की रहने वाली है। पिता बैंक में मैनेजर हैं और मां स्पेशल एबेल्ड बच्चों के स्कूल में मनोचिकित्सक हैं। वृत्ति बचपन से ही हर फील्ड में माहिर रही हैं। डांस, पेंटिंग, स्पोट्र्स हो या फिर पढाई और अध्यात्म के बारे में भी उसकी काफी रुचि है, वृत्ति को रामचरित मानस कंठस्थ याद है।

रोहतक के मॉडल स्कूल से बारहवीं करने के बाद रादौर से मैकेनिकल इंजीनियर करने लगी। फाईनल ईयर में उसका जापान की एक कम्पनी में चयन हो गया। इस दौरान 2015 में उसे चंडीगढ में विंग कमांडर पूजा से मिलने का अवसर मिला, जोकि अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को एस्कार्ट कर चुकी हैं। उनसे प्रेरणा लेकर वृत्ति ने आर्मी में जाने की ठानी।

हालांकि जापानी कम्पनी ने उसे अच्छा वेतन देकर जापान में ही भेज दिया, लेकिन वृत्ति का मन कहीं ओर लगा हुआ था। इस दौरान उसने एसएसबी की परीक्षा देनी शुरू की। दो बार असफलता के बाद तीसरी बार चयन हो गया, लेकिन वजन ज्यादा होने के कारण बडी चुनौती सामने खडी थी। वृत्ति ने अपनी नौकरी के साथ-साथ वजन को भी कम किया और एकेडमी में प्रवेश पा लिया।

वृत्ति का कहना है कि बेटियां किसी भी फील्ड में पीछे नहीं हैं। लेकिन उनको मौका मिलना चाहिए, कोई भी काम असंभव नहीं है। देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हुआ था, आज वह बेहद खुश है कि देश के लिए अपना योगदान देंगी। वृत्ति ने अपनी उपलब्धि के लिए अध्यापक, अभिभावक और मेहनत को श्रेय दिया। वृत्ति की मां डा. मधु का कहना है कि अगर नियमित तौर पर बच्चों पर ध्यान दिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है, पूरे परिवार को अपनी बेटी पर गर्व है

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