चिदंबरम की वजह से कांग्रेस हुई चित!

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देहरादून। कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उत्‍तराखंड सरकार को एक झटका दिया है। हाईकोर्ट ने शराब नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्णय सुनाते हुए सरकार को विदेशी शराब का कोटा निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं।

पी चिदंबरम ने की थी पैरवी
देश के पूर्व वित्त मंत्री व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने शराब कोटा कम करने पर कंपनी की ओर से पैरवी करते हुए कहा था कि आबकारी नीति में प्रावधान है कि विभिन्न ब्रांडों का न्यूनतम स्टाक रखा जाना अनिवार्य है। इस प्रकरण पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

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राज्य सरकार ने कम की शराब की डिमांड
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मैसर्स यूनाइटेड स्प्रिट्स लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने उनकी शराब की डिमांड कम कर दी है। इस मामले में याचिकाकर्ता तथा सरकार की ओर से धुआंधार बहस हुई थी।

चिदंबरम के तर्क के सामने नहीं चली सरकार की दलील
पी. चिदंबरम ने बहस करते हुए कहा था कि राज्य की आबकारी नीति में विभिन्न ब्रांडों का न्यूनतम स्टाक रखा जाना अनिवार्य किया गया है तथा फुटकर अनुज्ञापी की मांग के अनुसार उसे विभिन्न ब्रांडों की शराब उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

शराब व्यवसाय मौलिक अधिकार नहीं
सरकार की ओर से महाधिवक्ता यूके उनियाल व उनके सहयोगी व मंडी परिषद के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुरूप शराब व्यवसाय मौलिक अधिकार नहीं है तथा राज्य की आबकारी नीति में व्यवसाइयों तथा थोक विक्रेता मंडी परिषद के बीच विवाद की स्थिति में आपसी बातचीत और मध्यस्थता का प्रावधान है। बगैर मध्यस्थता के सीधे रिट दायर करने पर याचिका पोषणीय नहीं है।

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सुरक्षित रखा गया निर्णय
कोर्ट ने उस दिन इस पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में कोर्ट ने अपने निर्णय में सरकार को विदेशी शराब का कोटा निर्धारित करने के लिए कहा है।

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