पुण्यतिथि विशेष: राजनीति में शुचिता एवं पवित्रता की निरंतर वकालत करते थे लोकनायक जयप्रकाश नारायण

पुण्यतिथि: राजनीति में शुचिता एवं पवित्रता की निरंतर वकालत करते थे लोकनायक जयप्रकाश नारायण

नई दिल्ली: आज ‘जेपी’ और ‘लोकनायक’ नाम से मशहूर बिहार की माटी से जुड़े जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि है। आज उनके उस जीवन के बारे में आपको बता रहे हैं जिसका अप्रितम प्रतिमान इतिहास युगों-युगों तक याद करेगा। वे एक कुशल राजनीतिज्ञ भले ही न रहे हों परन्तु राजनीति की उन्नत दिशाओं के वे सदैव पक्षधर थे, प्रेरणास्रोत थे। जेपी देश की राजनीति की भावी दिशाओं को बड़ी गहराई से महसूस करते थे। यही कारण है कि बे राजनीति में शुचिता एवं पवित्रता की निरंतर वकालत करते रहे।

जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी को चुनौती देकर वर्ष 1974 में देश में सम्पूर्ण क्रांति की शुरूआत की थी। जिसके बाद तत्कालीन PM इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात में राष्‍ट्रीय इमरजेंसी घोषित कर दी। लोकनायक जयप्रकाश को इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें चंडीगढ़ में बंदी बनाकर रखा गया था। पटना में अपने आवास पर 8 अक्टूबर 1979 को जेपी का निधन हुआ। वर्ष 1999 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ भी उनके नाम पर है।

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आम जनजीवन को एक नई दिशा दी, नए मानक गढ़े

लोकनायक जयप्रकाश ने भारतीय राजनीति को ही नहीं बल्कि आम जनजीवन को एक नई दिशा दी, नए मानक गढ़े। जैसे – भौतिकवाद से अध्यात्म, राजनीति से सामाजिक कार्य तथा जबरन सामाजिक सुधार से व्यक्तिगत दिमागों में परिवर्तन। वे विदेशी सत्ता से देशी सत्ता, देशी सत्ता से व्यवस्था, व्यवस्था से व्यक्ति में परिवर्तन और व्यक्ति में परिवर्तन से नैतिकता के पक्षधर थे। वे समूचे भारत में ग्राम स्वराज्य का सपना देखते थे और उसे आकार देने के लिए अथक प्रयत्न भी किए।

वस्था के परिवर्तन के लिए क्रांति, ’संपूर्ण क्रांति’ आवश्यक

देश में कांग्रेस के खिलाफ संपूर्ण क्रांति के आह्वान में उन्होंने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब संपूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और संपूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रांति, ’संपूर्ण क्रांति’ आवश्यक है।’

आज उनकी पुण्य तिथि पर देश के तमाम भाजपा के बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित की है।

देश के गृह मंत्री अमित शाह ने ट्विटर पर ट्वीट करके उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा ‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का मातृभूमि के लिए समर्पण अनुकरणीय था। स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपातकाल के विरुद्ध उनका सम्पूर्ण क्रांति का विचार हर देशवासी के लिए सदैव एक प्रेरणा का केंद्र रहेगा। लोकतंत्र के ऐसे पुरोधा की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन।’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लिखते हैं ‘महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी, लोकतांत्रिक मूल्यों के सजग प्रहरी, सम्पूर्ण क्रांति के जनक, राष्ट्र की जनतांत्रिक चेतना के उन्नायक, लोकनायक श्री जयप्रकाश नारायण जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन। आपातकाल में जनतंत्र की पुनर्स्थापना हेतु आपका संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणा है।’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लिखते हैं,’ देश के लोकतंत्र पर हुए सबसे बड़े आघात ‘आपातकाल’ के विरुद्ध ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का उद्घोष देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, भारत रत्न लोकनायक श्री जयप्रकाश नारायण जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन। राष्ट्र के प्रति आपकी अप्रतिम निष्ठा व समर्पण भाव सदैव स्मरणीय रहेगा।’

 

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