लोकायुक्त प्रकरण पर उजागर हुई सपा-बसपा की मिलीभगत

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा है कि लोकायुक्त प्रकरण पर चल रहे घमासान से सपा-बसपा की मिलीभगत एक बार फिर उजागर हुई है। उन्होंने कहाकि वीरेन्द्र सिंह यादव का नाम लोकायुक्त के रूप में घोषित होने पर इलाहाबाद उच्च न्यायायल के मुख्य न्यायधीश डीवाई चन्द्रचूड़ ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि पैनल में वीरेन्द्र सिंह का नाम नहीं था।

संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश डीवाई चन्द्रचूड़ ने पत्र लिखकर अपनी आपत्ति सर्वोच्च न्यायायल और उप्र के राज्यपाल को दर्ज करायी। पत्र के आलोक में सर्वोच्च न्यायालय ने लोकायुक्त के रूप में वीरेन्द्र सिंह के कल राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण को स्थगति कर दिया।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण से प्रदेश में गम्भीर संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के ऐसे आचरण से लोकतंत्र कलंकित हुआ।

श्री बाजपेयी ने कहा कि नेता सदन (अखिलेश यादव) और नेता प्रतिपक्ष (स्वामी प्रसाद मौर्य) द्वारा निजी एजेण्डे को लागू करने से जनता अपने को ठगा महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती तीन बार उप्र की मुख्यमंत्री रही हैं हरियाणा, पंजाब के मुद्दे पर तत्काल प्रतिक्रिया देती हैं किन्तु भ्रष्टाचार के निवारण की महत्वपूर्ण कड़ी लोकायुक्त की नियुक्ति पर उनकी चुप्पी संदेह उत्पन्न कर रही है।

उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सपा-बसपा की मिली भगत उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में वकील कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल थे। ज्ञातव्य हो कि ‘‘वीरेन्द्र सिंह यादव’’ का सपा सुप्रीमो से करीबी सम्बन्ध है। सूत्रों के अनुसार उनका पुत्र समाजवादी पार्टी का पदाधिकारी है।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button