सावधान! नशे से भी घातक है ये आम सी दिखने वाली ख़ास आदत, नहीं जागे तो मौत देगी दस्तक

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लंदन। दुनिया में बढ़ते नशे के कारोबार को रोकने के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट बनाये गए हैं, जो भड़के युवाओं को राह दिखाने का काम करते हैं। नशे की लत इंसान की जिंदगी वीरान बना देती है। दुनिया से ऐसे लोगों का ताल्लुक न के बराबर रह जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना नशे के भी कुछ लोगों की एक ख़ास आदत उनकी जिंदगी पर भारी पड़ने लगती है। ये आदत नशे से भी ज्यादा घातक साबित हो सकती है। यदि आपने वक्त रहते इस पर ध्यान न दिया। बता दें बात कर रहे हैं, अकेले लाइफ बिताने वाले लोगों की। ये आदत बेहद ही खतरनाक साबित हो सकती है। कभी-कभी तो इसका इतना घातक असर इंसान की जिंदगी पर पड़ता है कि वह इंसान मौत की कगार पर जा पहुंचता है।

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नशे की लत

अमेरिका की एक रिसर्च के मुताबिक, अकेलेपन से सेहत को उतना ही नुकसान होता है, जितना 15 सिगरेट रोज पीने से। अमेरिकी विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे आम बीमारी हृदय रोग और डायबिटीज नहीं, बल्कि अकेलापन की है।

वहीं हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी सिगना के सर्वे में पाया गया कि अकेलापन अमेरिका में महामारी के स्तर पर पहुंच गया है। 46% लोग बताते हैं कि वे हमेशा या कभी-कभी अकेलापन महसूस करते हैं। 18 से 22 साल के युवाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा है। यही दिक्कत जापान में भी है। वहां अकेलेपन से बुजुर्गों की मौत हो रही है। इसे कोडोकुशी कहते हैं।

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खबरों के मुताबिक़ दुनिया में पहली बार किसी देश ने अकेलेपन की समस्या से निपटने के लिए लोनलीनेस मिनिस्ट्री बनाई गई है। 42 साल की ट्रेसी क्राउच को मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है।

आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन की 14% आबादी यानी 90 लाख लोग अकेलेपन के शिकार माने जाते हैं। अकेलेपन से सेहत को रोजाना 15 सिगरेट पीने जितना खतरा रहता है।

इस अनोखे मंत्रालय का प्रभार मिलने के बाद से ट्रेसी का ईमेल अकाउंट सवालों से भरा रहता है। उनका फोन लगातार बजता रहता है। अपॉइंटमेंट की भी लंबी लिस्ट है।

ब्रिटेन की सांसद जो। कॉक्स ने एक बार अकेलेपन से जुड़ी समस्या पर रिसर्च साझा की थी। इसी रिसर्च के बाद अकेलेपन मामलों का मंत्रालय बनाने की प्रेरणा मिली। कॉक्स की 2016 में यूके ब्रेक्जिट रेफरेंडम कैम्पेन के दौरान हत्या कर दी गई थी।

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ट्रेसी के लोनलीनेस मिनिस्ट्री संभालने के बाद से अलग-अलग देशों के मंत्री और प्रतिनिधि इस खास मंत्रालय के कामकाज को समझने और सीखने ब्रिटेन आ रहे हैं। इनमें नॉर्वे, डेनमार्क, कनाडा, यूएई, स्वीडन, आईसलैंड, न्यूजीलैंड, जापान और जर्मनी शामिल हैं।

ब्रिटेन की मंत्री ट्रेसी के मुताबिक, यूके में 16 से 24 साल के युवा सबसे ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं। अकेलेपन का बड़ा कारण सोशल मीडिया है।

डिजिटल माध्यमों से जुड़ी पीढ़ी में अकेलापन बढ़ता दिखाई दे रहा है। युवाओं को लगता है उनके पास इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 200 दोस्त हैं, लेकिन असल में वे दोस्त नहीं होते।

हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म ही इसका सॉल्यूशन भी है। बुजुर्गों को कम्प्यूटर सिखाकर उन्हें फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए देश के दूसरे कोनों में बैठे युवाओं से जोड़ा जा सकता है।

ट्रेसी का कहना है कि अकेलेपन का दूसरा कारण देर से शादी और सिंगल रहना भी है। यूरोपीय यूनियन में सबसे ज्यादा सिंगल रहते हैं। कम आय वाले लोगों को अकेलेपन से बचाने के लिए अलग-अलग जगहों पर सेंटर खोले गए हैं।

रेडियोक्लब और सीनियर सिटिजन का फोन पर संपर्क काफी कारगर साबित हो रहा है। लोनलीनेस मंत्रालय इसके लिए 182 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है।

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