भगवन विष्णु का व्रत योगिनी एकादशी की पूजन विधि तथा महत्व

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं, पौराणिक कथाओ के आधार पर यह मान्यता है कि इस दिन भगवन विष्णु की पूजा अर्चना करने से सारे दुखो से मुक्ति मिलती है जो इस वर्ष 29 जून दिन शनिवार को है। मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस दिन विधि विधान से श्रीहरि की पूजा और व्रत किया जाता हैं। हर व्रत में कुछ न कुछ नियम होते है इस योगिनी एकादशी व्रत में महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें चावल का प्रयोग कदापि न करें।

योगिनी एकादशी व्रत एवं पूजा विधि

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर पवित्र जल से स्नान करें। इसके पश्चात पूजा घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर की अक्षत्, चंदन, पुष्प, धूप आदि से पूजा करें। फिर विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र का जाप करें। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को सात्विक रहकर ही इसे पूरा करना चाहिए।

योगिनी एकादशी को दान का महत्व

योगिनी एकादशी के दिन दान का भी महत्व है। इस दिन जल और अन्न का दान बहुत पुण्यकारी माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन भर अन्न नहीं खाना चाहिए, फलाहार कर सकते हैं। सबकी अपनी अपनी मान्यता है कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, तो कुछ फलाहारी|

विशेष

योगिनी एकादशी के दिन कोई भी व्यक्ति जो रोगों से पीड़ित है, उसे भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना के साथ ही सुन्दरकाण्ड का पाठ करना चाहिए। इससे उसके कष्ट मिट जाते है। और उत्तम फल मिलता है।

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