लखनऊ के सांसद Kaushal Kishore बने केंद्रीय राज्य मंत्री, भगत सिंह है Ideal, करना चाहते थे नौकरी

उत्तर प्रदेश लखनऊ के मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर ने संभाला आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री का कार्यभार, भगत सिंह हैं उनके Ideal

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रीमंडल (Cabinet) का विस्तार किया है। जिसमें 43 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ले कर कार्यभार संभाला है। उनमें से एक कौशल किशोर (Kaushal Kishore) भी थे। जिन्होंने आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला है। कौशल किशोर उत्तर प्रदेश लखनऊ (Lucknow) के मोहनलालगंज (Mohanlalganj) से सांसद हैं।

कौशल किशोर ने राज्य मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद कहा, मैं पहले अधिकारियों के साथ बैठक करके सभी चीजों को समझूंगा। पूरी जानकारी लेने के बाद कैसे लक्ष्य को प्राप्त किया जाए इसके लिए काम करूंगा।

ऐसे आए राजनीति में कौशल किशोर

कौशल किशोर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, राजनीति में आना उनका एक संयोग था। उन्होंने बताया कि मैं भी एक अच्छी नौकरी करना चाह रहा था। फिर वो समय रहते नहीं मिल पाई। तो फिर उनके क्षेत्र में उनके यहां कुछ लोग कम्युनिस्ट पार्टी में थे तो उन्हें उनकी बातें अच्छी लगती थी। उनके नारे कौशल किशोर को अच्छे लगते थे। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी एक नारे को खुद लय के साथ बोल कर बताया –

जब तक भूखा इंसान रहेगा धरती पे एक तूफान रहेगा,

जो धरती को जोते बोए वो धरती का मालिक होए,

धनुधरती बंट कर रहेगी भूखी जनता चुप ना रहेगी।

गरीबी में पले बढ़े

ये नारे कौशल किशोर को अच्छे लगते थे। कौशल किशोर ने खुद बताया कि वास्तव में हम लोग गरीबी में पले बढ़े है। तो लगता था कि इन नारों की वजह से सब कुछ ठीक हो जाएगा। तो मैं धीरे-धीरे आकर्षित हुआ कम्युनिस्ट पार्टी में चला गया। वहीं से हम लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहे फिर क्षेत्र में काफी स्ट्रगल के मामले आ गए बहुत Untouchability (अस्पृश्यता) थी, लोगों का दमन होता था। सामन शाही चलती थी। गरीब आदमी से काम करवाकर के पैसे नहीं दिए जाते थे। उन लोगों के लिए मैं लड़ते-लड़ते चुनाव में आ गया। फिर 6 चुनाव मैंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India)  से लड़ा। और हारा उन्होंने बताया कि फिर मेरा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी में विवाद हुआ। कुछ Issue को लेकर के तो मैंने उस पार्टी यानी कि (कम्यूनिस्ट पार्टी) को छोड़ा और अपनी निर्दलीय पार्टी बनाई।

 

मलिहाबाद से MLA का चुनाव

कौशल किशोर ने बताया कि मैंने 2002 में लखनऊ के मलिहाबाद से MLA का चुनाव जीता। मंत्री भी रहा मैं। उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार में भी कुछ मुद्दों को लेकर मेरी पटरी नहीं बैठी तो मैंने इस्तीफा दे दिया। उसके बाद भी वो चार पांच चुनाव MLA  के फिर हारे। 2014 में राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में आया तो फिर BJP ने उन्हें सांसद बना दिया। दोबारा 2019 में वो फिर से सांसद बन गए।

राजनीति में आने का उद्देश्य

कौशल किशोर बताया कि उनका राजनीति में आने का उद्देश्य था लोगों की समस्याओं का निदान होना। चूंकी मैं “बहुत डाउन पूअर क्लास से निकलकर आया हूं। तो इसलिए मैं लोगों की प्रॉब्लम को अपनी प्रॉब्लम समझता हूं मुझे लगता है कि इनकी जगह मैं होता तो क्या होता। क्योंकि मैंने वो सब समस्याएं झेली है। इसलिए लोगों की भीड़ उनके यहां लगती है। लोग उनके ऊपर विश्वास भी करते हैं।

भगत सिंह आइडियल

केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि राजनीति में एक ऐसी आदर्श राजनीति बननी चाहिए जिससे कि नेताओं के ऊपर जो आरोप लगते हैं वो खत्म होनी चाहिए। जो भी सांसद या विधायक चुनाव जीतें जनता उनको अपना आइडियल मानें इस तरह का काम करना चाहिए मेरी प्रयास यही है। कौशल किशोर अपना आइडियल (Ideal) भगत सिंह (Bhagat Singh) को मानते हैं। क्योंकि उनकी जो शैली थी काम करने कि वो जिस तरह से देश को आगे ले जाना चाहते थे। वो भी ठीक वैसे ही देश को आगे ले जाना चाहते हैं।  उन्होंने बताया कि भगत सिंह इसलिए फांसी के फंदे पर चढ़ गए कि भगत सिंह ने सोचा कि मेरे फांसी के फंदे पर चढ़ने से देश में एक उबाल आएगा और शोषण करने वाले अंग्रेजो को जनता भारत से भगा देगी। इसलिए अपनी जान की कुर्बानी भगत सिंह ने दी थी।

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