देश में 7 और 8 अगस्त को पड़ेगा चंद्रग्रहण, जाने क्या करें और क्या न करें

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भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण दक्षिण व पूर्वी एशिया के अधिकतर  देशों में , यूरोप,अफ्रीका,के देशों,आस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में ये दिखाई देगा।

भारत में ग्रहण से पूर्व ही चन्द्रोदय हो जाएगा। इस कारण ग्रहण का सूतक 7/8/2017 दिन सोमवार को  तीन प्रहर पहले अर्थात दोपहर 01:52से प्रारंभ होगा। ध्यान रहे ग्रहण के सूतक के समय बालक, वृद्ध, व रोगियों के अलावां अन्य किसी को भोजन नही करना चाहिए।

ग्रहण काल:-ग्रहण का स्पर्श:-रात्रि 10:52 पर
ग्रहण मध्य:-रात्रि 11:51पर
ग्रहण मोक्ष:-रात्रि 12:49 पर होगा।

 ध्यान रखने योग्य बातें:-
ग्रहण आरंभ होते ही  स्नान करके जप- हवन करना चाहिए।
ग्रहण के मध्य में दान किया जाता है ।
ग्रहण  समाप्त होने पर वस्त्र सहित स्नान करने का विधान है।
ये उपरोक्त कार्य करने  से अक्षुण्य पूण्य की प्राप्ति होती है।

ग्रहण काल मे क्या करें, क्या न करें:-
ग्रहण काल से पहिले ही ब्राम्हण विद्वानों से परामर्श लेकर दान देने योग्य वस्तुओं को इकट्ठा करके ग्रहण काल मे संकल्प करके  मोक्ष के बाद अथवा अगले दिन  संकल्प करके संचित वस्तु का दान देना चाहिए।

ग्रहण काल मे श्राद्ध करने का विशेष माहात्म्य लिखा गया है।यद्यपि सन्ध्याकाल व रात्रिकाल श्राद्ध के लिए वर्जित बताया गया है किंतु ऋषियों ने ग्रहणकाल में श्राध्द का विशेष महत्व बताया है। यदि  किन्ही विशेष परिस्थितियों में ब्राम्हण न उपलब्ध हो पावें तो अन्य वर्णों को भी दान दिया जा सकता हैं।

विशेष कर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल मे शयन करना, सब्जी काटना, पापड़ सेंकना, आदि से परहेज करना चाहिए। धार्मिक ग्रन्थों का पाठ कर प्रसन्न चित्त रहना चाहिए। इससे भावी संतान सद्गुणों से युक्त होता है ।

 ग्रहण में दूषित व अदूषित खाद्य:- पका हुवा अन्न, कटी हुई सब्जी, व फल ग्रहण काल में दूषित हो जाते है उन्हें बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, लेकिन तेल, घी में पका या तला हुआ अन्न, घी, तेल, दूध, दही, लस्सी, मक्खन, पनीर, अचार, चटनी, नीबू, सिरका, मुरब्बा, आदि में तिल या कुश रख देने से ये ग्रहणकाल में दूषित नहीं होते है।सूखे खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ ,चना, दाल, आटा आदि में टिल या कुश डालने की जरूरत नही हैं।

ग्रहण का फल:- यह ग्रहण श्रवण नक्षत्र , मकर राशि मे घटित होगा। अतः मकर राशि के श्रवण नक्षत्र में जन्में लोगों के लिए यह ग्रहण अशुभ फल कारक होगा।

 अन्य सभी राशियों के लिये ग्रहण का फल निम्न है:-

मेष:- कष्ट भय।
वृष:- सन्तान चिंता।
मिथुन:-सुख लाभ , शत्रुभय।
कर्क:-स्त्री , पति कष्ट।
सिंह:-गुप्त चिंता ,रोग।
कन्या:- कार्यों में विलंब।
तुला:-कार्य सिद्धि।
वृश्चिक:-धन लाभ।
धनु:-धन हानि ।
मकर:-शारीरिक कष्ट।
कुंभ:-धन हानि।
मीन:- लाभ उन्नति।

 ध्यान दें :- जिन राशियों को ग्रहण अच्छे फल न दे रहा हो  उन सभी जातकों को अपने राशि स्वामी अथवा चंद्रमा के बीज मंत्र का जप , दान , आदि कर के अनिष्ट से बचना चाहिए। नवग्रह से सम्बंधित औषधियों से भी स्नान करना लाभ कारी माना गया है।

◆आप सबका मंगल हो◆
आचार्य स्वामी विवेकानन्द
ज्योतिर्विद श्री अयोध्या धाम

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