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Mahakumbh 2021: दूसरे शाही स्नान में साधुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी

उत्तराखंड महाकुंभ के दूसरे 'शाही स्नान' में साधुओं सहित श्रद्धालुओं ने हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गंगा नदी में शाही स्नान किया

हरिद्वार: आस्था का सबसे बड़ा पर्व कुंभ मेला (Kumbh) इस बार उत्तराखंड (Uttarakhand) की देव भूमि हरिद्वार (Haridwar) में आयोजित हुआ है। कुंभ मेला की शुरूआत 1 अप्रैल से हो चुकी है जिसका समापन 30 अप्रैल को होगा। आज यानी कि 12 अप्रैल को दूसरा शाही स्नान हो रहा है। इस मौके पर जूना अखाड़े के साधुओं समेत श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी पर गंगा नदी में शाही स्नान किया है।

कोरोना (Corona) संक्रमण के देखते हुए भारत सरकार ने पहले ही सभी यात्रियों के लिए COVID-19 की निगेटिव रिपोर्ट और सर्टिफिकेट को मुख्य रूप से अनिवार्य किया है। उत्तराखंड (Uttarakhand) महाकुंभ के दूसरे ‘शाही स्नान’ में निरंजनी अखाड़े के साधुओं ने भी हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गंगा नदी में शाही स्नान किया है।

मेले का आयोजन

कुंभ पर्व हिंदू धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें साल और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। 2013 का कुंभ प्रयाग में हुआ था। फिर 2019 में प्रयाग में अर्धकुंभ मेले का आयोजन हुआ था।

अमृत बूंदें

कुंभ (Kumbh) पर्व के आयोजन को लेकर दो-तीन पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से अधिक प्रचलित कथा देव-दानवों द्वारा “समुद्र मंथन” से प्राप्त अमृत कुंभ से अमृत बूंदें गिरने को लेकर है। इस कथा के अनुसार महर्षि दुर्वासा के शाप के कारण जब इंद्र और अन्य देवता कमजोर हो गए तो दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया। तब सब देवता मिलकर भगवान विष्णु के पास गए और उन्हें सारी बताई।

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