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महाकुंभ 2021: इस दिन बाधित रहेगा पूरा यातायात, जानें स्नान की तारीख

12 तारीख को कुंभ का दूसरा शाही स्नान है। 13 तारीख को नव संवत का और 14 तारीख को वैशाखी के दिन तीसरा शारी स्नान है। इस दौरान हाईवे पर ट्रैफिक की आवाजाही नहीं रहेगी

हरिद्वार: आस्था का सबसे बड़ा पर्व कुंभ मेला (Kumbh Mela) इस बार उत्तराखंड की देव भूमि हरिद्वार में आयोजित हुआ है। कुंभ मेला की शुरूआत 1 अप्रैल से हो चुकी है और समापन 30 अप्रैल को होगा। जिसके लिए कुंभ में कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए भारत सरकार ने सभी यात्रियों के लिए कोविड-19 (COVID-19) की निगेटिव रिपोर्ट और सर्टिफिकेट को मुख्य रूप से अनिवार्य किया है।

कल यानी कि 12 तारीख को दूसरा शाही स्नान है। 13 तारीख को नव संवत का और 14 तारीख को वैशाखी के दिन तीसरा शारी स्नान है। इस दौरान हाईवे पर ट्रैफिक की आवाजाही नहीं रहेगी। जिसकी जानकारी IG कुंभ ने दी है।

मेले का आयोजन

कुंभ पर्व हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें साल और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। 2013 का कुम्भ प्रयाग में हुआ था। फिर 2019 में प्रयाग में अर्धकुंभ मेले का आयोजन हुआ था।

कुंभ में शाही स्नान

देव भूमि हरिद्वार में श्रद्धालु हर साल कुंभ के मेले में आस्था कि डूबकी लगाते है। इस साल कुंभ का पावन मेले का शुभारंभ 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। कुंभ में साधु-संतो के चार शाही स्नान होते हैं। इस मेले में दुनियाभर के लोग गंगा में स्नान करने के लिए आते है। इस मेले में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाता है।

अमृत बूंदें गिरने को लेकर कथा

कुंभ (Kumbh) पर्व के आयोजन को लेकर दो-तीन पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से अधिक प्रचलित कथा देव-दानवों द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कुंभ से अमृत बूंदें गिरने को लेकर है। इस कथा के अनुसार महर्षि दुर्वासा के शाप के कारण जब इंद्र और अन्य देवता कमजोर हो गए तो दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया। तब सब देवता मिलकर भगवान विष्णु के पास गए और उन्हें सारी बताई।

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