NRC पर भड़काऊ बयान देने पर ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज, तृणमूल ने पुलिस पर लगाया आरोप  

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से संबंधित टिप्पणी के बाद असम पुलिस ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने असम पुलिस पर पलटवार किया है। तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, ऐसी कार्रवाई उन्हें बंगालियों के हित की लड़ाई लड़ने से नहीं रोक पाएगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कई साडी शिकायतें पुलिस को मिली थीं कि उन्होंने पूर्वोत्तर के इस राज्य में एनआरसी लागू किये जाने को लेकर ‘भड़काऊ’ बयान दिए हैं। इस बारे में बताते हुए तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि यदि भाजपा और असम सरकार सोचती है कि वे तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को मुसलमानों के हितों की लड़ाई लड़ने से रोक सकती हैं तो वे ख्याली दुनिया में हैं।

वहीँ पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि ऐसा करके पुलिस हमारी लड़ाई को रोक नहीं पायेगी। तृणमूल बंगालियों के हितों के लिए लडती रहेगी। हम असम से बंगालियों को खदेड़ने की ऐसी तरकीबें देख चुके हैं। यदि बंगाली खतरे में होंगे तो ममता बनर्जी और तृणमूल चुप नहीं बैठेंगी।

इस बीच, असम कांग्रेस ने आरोप है कि राज्य के 13 जिलो में कुछ खास हिस्सों में 90 फीसदी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के पहले मसौदे के बाहर छोड़ दिया गया। उसने इसकी जांच की मांग की। असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने आरोप लगाया कि 208 एनआरसी सेवा केंद्रों पर 13 जिलों का सत्यापन किया गया जो सही तरीके से नहीं हुआ।

इन क्षेत्रों बस 10 फीसदी लोगों के नाम एनआरसी में आए हैं ये जिले दर्रांग, मोरीगांव, नागांव, ग्वालपारा, ढुबरी, कछार, कैमज्ञाज, हैलाकांडी, कोकराझार, बारपेटा, मनकच्छार, नालारी और बोगांईगांव हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के अहमदपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि एनआरसी में बंगालियों का नाम हटाकर असम से बहार करने कि साजिश के है।

 

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