तीसरी बार Mamata Banerjee ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, जानें रेल मंत्री से CM बनने का ऐतिहासिक सफर

प्रचंड जीत के साथ TMC नेता ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बन गई है, कोलकाता के राजभवन में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ TMC  नेता ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) लगातार तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बन गई है। कोलकाता के राजभवन में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। कोरोना संकट को देखते हुए शपथ ग्रहण समारोह बहुत छोटा सा रखा गया था, जिसमें ममता बनर्जी ने अकेले ही शपथ लिया उनके साथ किसी भी मंत्री ने शपथ नहीं ली है।

हिंसा का अंत

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankar) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुभकामानाएं देते हुए बोले कि मैं तीसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बधाई देता हूं। आशा है कि शासन संविधान और कानून के नियम के अनुसार चलेगा। हमारी प्राथमिकता इस संवेदनहीन हिंसा का अंत करना है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कानून के शासन को बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाएंगी।

PM मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी है।

Mamata Banerjee की पढ़ाई

ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख नेता हैं। लोग उन्हें दीदी (बड़ी बहन) के नाम से कहकर बुलाते हैं। Mamata Banerjee का जन्म एक बंगाली हिन्दू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता प्रोमिलेश्वर बनर्जी और गायत्री देवी थे। बनर्जी के पिता, प्रोमिलेश्वर की चिकित्सा के अभाव में मृत्यु हो गई, जब वह 17 वर्ष के थे। उन्हें कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर से डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी मिली। उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (डी.लिट) की डिग्री से भी सम्मानित किया गया था।

रेल मंत्री के रूप में कार्य

ममता बनर्जी ने इससे पहले दो बार रेल मंत्री के रूप में कार्य किया, ऐसा करने वाली पहली महिला हैं। वह भारत सरकार के कैबिनेट में कोयला, और मानव संसाधन विकास, युवा मामलों और खेल, महिला और बाल विकास मंत्री की पहली महिला मंत्री भी हैं। सिंगुर में किसानों और किसानों की लागत पर विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट सरकार के औद्योगीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण की नीतियों का विरोध करने के बाद वह प्रमुखता से बढ़ीं।

TMC के संस्थापक

1997 में, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सोमेंद्र नाथ मित्रा के साथ राजनीतिक विचारों में अंतर के कारण, ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और मुकुल रॉय के साथ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) के संस्थापक सदस्यों में से एक बन गईं।

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