रामनवमी हिंसा के बाद हनुमान जयंती को लेकर ममता सरकार सख्त, सशस्त्र रैलियों पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली। रामनवमी के मौके पर पश्चिम बंगाल में भड़की हिंसा के बाद आज हनुमान जयंती का पर्व है। पुलिस प्रशासन के लिए इसे शांतिपूर्ण ढ़ंग से संपन्न कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस अवसर पर किसी भी तरह की हिंसा न होने पाए इसके लिए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले से ही कड़े फरमान जारी कर दिए हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां निकाली जाने वाली सशस्त्र रैलियों व जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। माहौल में तनाव देखते हुए धार्मिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

हनुमान जयंती को लेकर बीजेपी ने किया बड़ा फैसला
बंगाल में ममता सरकार तो प्रदेश में शांति बहाल करने में लगी हुई है। इसके साथ ही बीजेपी व विश्व हिंदू परिसद ने भी यहां हनुमान जयंती के अवसर पर बड़ा फैसला लिया है। इन दोनों संगठनों ने इस धार्मिक अवसर पर क्षेत्र में तनाव देखते हुए किसी भी तरह की रैली नहीं निकालने का फैसला किया है। जबकि सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस अवसर को पूरे धूमधाम से मनाने की घोषणा की है। इससे पहले ममता बनर्जी ने सूबे के आला अधिकारियों के साथ मुलाकात कर जयंती के अवसर पर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी रखने को कहा है।

राज्य सरकार द्वारा सशस्त्र जुलूसों और रैलियों पर प्रतिबंध के विषय पर दुर्गापुर के पुलिस कमिश्नर एलएन मीणा ने बताया कि हमने राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कोलकाता और राज्य के दूसरे संवेदनशील हिस्सों के लिए अतिरिक्त बल को लगाया गया है। राज्य सरकार की तरफ से बिना हथियारों के जुलूस रैलियां निकालने के लिए ही अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि हमने शरारती तत्वों पर पूरी नजर रखी हुई है। पहले से ही सावधानी बरतते हुए इस मामले में हमने 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जो राज्य में हिंसा फैला सकते हैं।

रामनवमी पर भड़क उठी थी हिंसा
रामनवमी के दिन रानीगंज में भड़की हिंसा आसनसोल तक पहुंच गई है। हिंसा के दौरान दो दर्जन से ज्यादा घरों में आग लगा दी गई थी। अब तक तीन लोगों की जान चली गई है। रानीगंज में स्थिति सामान्य नहीं है। प्रशासन ने पूरे इलाके में 144 धारा लागू की है। इलाके में इंटरनेट सेवा भी पूरी तरह से बंद कर दी गई है।

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