Mann Ki Baat: PM मोदी ने वैक्सीन पर कहा- ये विश्व के लिए Case Study बनेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 78वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया है

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 78वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया है। पीएम मोदी अपने कार्यक्रम की शुरूआत फ्लाइंग सिख एथलीट मिल्खा सिंह (Milkha Singh) को श्रद्धांजलि देने से की।

Tokyo Olympics

मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले बोला कि कुछ दिन पहले कोरोना ने प्रसिद्ध एथलीट मिल्खा सिंह को हमसे छीन लिया। जब वे अस्पताल में थे, तो मुझे उनसे बात करने का अवसर मिला था। बात करते हुए मैंने उनसे आग्रह ​किया था कि आपने तो 1964 में टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत का प्रतिनिधित्व किया था इसलिए इस बार जब हमारे खिलाड़ी ओलंपिक के लिए टोक्यो जा रहे हैं तो आपको हमारे एथलीट का मनोबल बढ़ाना है।

पीएम ने कहा कि टोक्यो जा रहे हर खिलाड़ी का अपना संघर्ष रहा है, बरसों की मेहनत रही है। वो सिर्फ अपने लिए ही नहीं जा रहे हैं बल्कि देश के लिए जा रहे हैं। इन खिलाड़ियों को भारत का गौरव भी बढ़ाना है और लोगों का दिल भी जीतना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के खिलाफ हम देशवासियों की लड़ाई जारी है, 21 जून को वैक्सीन अभियान के अगले चरण की शुरुआत हुई और उसी दिन देश ने 86 लाख से ज़्यादा लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड भी बना दिया..वो भी एक दिन में। एक साल पहले सबके समाने सवाल था कि वैक्सीन कब आएगी? आज हम एक दिन में लाखों लोगों को मेड इन इंडिया वैक्सीन मुफ्त में लगा रहे हैं। यही तो नए भारत की नई ताकत है।

उन्होंने बोला कि कभी-ना-कभी ये विश्व के लिए केस स्टडी का विषय बनेगा कि भारत के गांव के लोगों, हमारे वनवासी-आदिवासी भाई-बहनों ने इस कोरोना काल में किस तरह अपने सामर्थ्य और सूझबूझ का परिचय दिया। गांव के लोगों ने क्वारंटीन सेंटर बनाए, स्थानीय जरूरतों को देखते हुए कोविड प्रोटोकॉल बनाए।

मानसून का सीजन

PM मोदी ने कहा कि हमारे देश में अब मानसून का सीजन (Monsoon season) भी आ गया है। बादल जब बरसते हैं तो केवल हमारे लिए ही नहीं बरसते बल्कि बादल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बरसते हैं। बारिश का पानी जमीन में जाकर इकठ्ठा होता है,जमीन के जलस्तर को भी सुधारता है इसलिए मैं जल सरंक्षण को देश सेवा का एक ही रूप मानता हूं।

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