मनरेगा कार्यों की जांच के लिए कमेटी गठित, RSS और हिन्दू संगठन के लोग शामिल

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नई दिल्ली। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी) जिसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है जो प्रतिदिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-सम्बंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार हैं। मनरेगा योजना सुचारू रूप से स्वचालित हो इसके लिए हर बार की तरह इस साल भी ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मई 2018 में केंद्रीय रोजगार गारंटी काउंसिल (सीइजीसी) का गठन किया है।

MNREGA

अगर इनके काउंसिल मेम्बर्स पर नजर डाली जाए तो सीइजीसी में विशेषज्ञता को दरकिनार कर राजनैतिक नियुक्तियों को ज्यादा तवज्जो दिया गया हैं। काउंसिल में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की मैगजीन पांचजन्‍य के संपादक, कुछ हिन्‍दू आध्‍यात्‍मि‍क संगठनों के सदस्‍य व एक ड्रोन कंपनी के मालिक का नाम शामिल है। इन्‍हें विभिन्‍न राज्‍यों से गैर-आधिकारिक सदस्‍यों का दर्जा दिया गया है।

पांचजन्य साप्ताहिक के संपादक, हितेश सोनकर को दिल्ली से गैर अधिकारिक सदस्य नामित किया गया है। वहीँ उत्तराखंड से संजात चतुर्वेदी का नाम तय किया गया है जो डिवाइन इंटरनेशनल फाउंडेशन (आईऍफ़) के संयोजक हैं।

सीइजीसी में बीजेपी सदस्‍य सुधीर अग्रवाल का भी नाम है, जो अपनी वेबसाइट पर खुद को कई स्वैच्छिक संगठनों के संघ संस्थापक-अध्यक्ष और बचपन से स्‍वयंसेवक बताते हैं। सीइजीसी के अन्‍य सदस्‍यों में बेंगलुरु की (एचयूवीआई) एअर टेक्‍नोलॉजीस प्राइवेट के सीईओ विक्षुत मुंदकुर का भी नाम है, जो कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनियों को ड्रोन डाटा के आधार पर जरूरी जानकारियां मुहैया कराते हैं। इसके अलावा पुणे की प्राइमो इंजीनियरिंग कंपनी के निदेशक संतोष रघुनाथ गोंधालेकर भी इस काउंसिल के सदस्‍य हैं। यह कंपनी एग्रीकल्‍चरल वेस्‍ट से बायोगैस निकालती है।

इन सभी नामो को देखकर ऐसा साफ़ प्रतीत होता है कि विशेषज्ञता को दरकिनार कर राजनैतिक नियुक्तियां की गई हों। ये सभी सदस्य अलग अलग राज्यों से गैर अधिकारिक सदस्यों की सूची में आते हैं, जो सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा चुने जाते हैं।

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