मानसून सत्र में होने वाले हैं कई बड़े बदलाव, सरकार ने जानकारी देने से किया इंकार

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नई दिल्ली। आगामी बुधवार से लोकसभा का मानसून सत्र शुरु होने वाला है। जिसको देखते हुए एकबार फिर से हंगामे की आशंका जताई जा रही है। इन आशंकाओं के चलते सरकार ने विपक्षी पार्टियों से कई महत्तवपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए सहयोग मांगा है। साथ ही कहा जा रहा है कि इस सत्र में होने वाले कामकाज के बुलेटिन से एक बिल को फिलहाल के लिए बाहर रखा गया है, जिसके बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल इस बिल का नाम सूचना का अधिकार, 2005 रखा गया है।

जानकारी के मुताबिक बुधवार यानि 18 जुलाई से शुरु होने वाले इस सत्र के अंतर्गत 18 बिल परिचय, ध्यानाकर्षण और पास करने के लिए किए जाएंगे। 17 बिल को ई कैटेगरी, जिसके अंतर्गत कुछ नए बिल पेश किए जाएंगे उस श्रेणी में डाला गया है। साथ ही कहा जा रहा है जीएसटी कानून में भी बड़े बदलाव की स्थिति में भी साझेदारी की सलाह हो रही है।

सूचना के मुताबिक आरटीआई यानि सूचना के अधिकार बिल संशोधन विधेयक 2018 के कॉलम में कानून के गठन के बारे में कुछ जानकारी दी गई है। जिसके मुताबिक ”सूचना का अधिकार कानून, 2005 में सुधार करना।” इस घटना ने न सिर्फ आरटीआई एक्टिविस्ट बल्कि आरटीआई का उपयोग करने वाले लोगों को भी निराश किया है। ये कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायत और पेंशन विभाग ने जानकारियां लेने वालों को भी मुश्किल हालातों से गुजरना ही होगा।

इस संशोधन के बारे में जानकारी देने से सभी अधिकारियों ने इंकार किया है। साथ ही कहा जा रहा है कि अधिकारी सरकार की 2014 वाली नीति पर बात करने से भी इंकार कर रहे हैं। जिसके तहत यह घोषणा की गई थी कि सरकार अगर कोई भी कानून बनाती है तो उसे जनता के सामने लगभग 30 दिन पहले चर्चा या टिप्पणी के लिए रखेगी। साथ ही उसके जानकारी भी मंत्रालय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने कानून में बदलाव के कदम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट करके कहा,”हमारे पास दुनिया का सबसे अच्छा आरटीआई कानून है। किसी को भी उसमें बदलाव करने की कोई जरूरत नहीं है। हमें सिर्फ उसे बेहतर तरीके से लागू करने के बारे में ध्यान से सोचना चाहिए।”इस याचिका में पीएम के साथ साथ 15 और लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही कई आरटीआई एक्टिविस्ट ने अपनी राय भी दी है।

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