‘कातिल सितम्बर’ से मुक्ति चाहता है यूपी का एक मेडिकल कालेज

encephalitis-518x319गोरखपुर। यूपी का एक मेडिकल कालेज ऐसा है जहां सितम्बर महीने में मौत का सिससिला शुरू हो जाता है। इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ने वाले मासूमों के परिजनों की रोने की आवाजे इस महीने में आम है।

यह वह महीना है जिसमें सबसे ज्यादा इंसेफेलाइटिस पीड़ित मरीज भर्ती कराये जाते हैं और मौतें भी इसी माह में ज्यादा होती हैं। इस साल भी इंसेफेलाइटिस के सर्वाधिक मरीज सितम्बर महीने में भर्ती कराये गये और मासूमों की मौत भी इसी महीने में ज्यादा हुई।

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नये साल में बीआरडी की सिर्फ एक चाहत है कि ‘कातिल सितम्बर’ से मुक्ति मिलनी चाहिए। इस साल सितम्बर महीने में कुल 514 इंसेफेलाइटिस पीड़ित बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कराये गये। इनमें से 115 मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की ही थी। पिछले साल भी यही आलम था।

अन्य महीनों की तुलना में सबसे अधिक 551 इंसेफेलाइटिस मरीज कालेज स्थित अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किये गये। इनमें से कुल 147 मरीजों ने दम तोड़ दिया। बीते पांच सालों का यह रिकॉर्ड रहा है कि अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर महीना गोरखपुर समेत आसपास के 18 जिलों के बच्चों के जीवन पर भारी पड़ता है।

बरसात के बाद बढ़ते हैं मामले

इंसेफेलाइटिस का सीधा संबंध मानसून के साथ होता है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने 15 जून से 14 नवम्बर तक की समयावधि को इंसेफेलाइटिस के नजरिये से रेड अलर्ट पीरियड घोषित कर रखा है। बरसात के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और जापानीज इंसेफेलाइटिस के केसेज बढ़ जाते हैं। ठीक इसी प्रकार खुले में किये गये शौच बहकर पारंपरिक जलस्रोतों में मिल जाते हैं।

छिछले हैंडपंप के माध्यम से पीने के पानी का सेवन करने वाले लोग इस गंदगी से पैदा हुए वायरस का शिकार होते हैं जिसे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) नाम से जाना जाता है। चूंकि बीते पांच सालों से मानसून का आगमन देरी से हो रहा है लिहाजा सितम्बर और अक्टूबर महीने में मामले बढ़ना आम है।

थोड़ी कमी भी आ रही है

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से साल दर साल इंसेफेलाइटिस पीड़ितों की संख्या में तो कमी आ रही है लेकिन मौतों का आंकड़ा चिढ़ाने वाला है। हांलाकि हाल ही में हुये विवाद के कारण ये आंकड़ें संदिग्ध माने जा रहे हैं। वर्ष 2010 के सितम्बर माह में 849 इंसेफेलाइटिस पीड़ित, वर्ष 2011 में 798, वर्ष 2012 में 777, वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में 556, फिर वर्ष 2014 के सितम्बर माह में 551 और वर्ष 2015 में 514 मरीज भर्ती कराये गये हैं। इन्हीं वर्षों और माह में मरने वालों की संख्या क्रमश: 136, 148, 138, 155, 147 और 115 रही है।

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