मराठा आंदोलन कीआग में झुलस रहा महाराष्ट्र, जानें क्या है मराठाओं की मांगे?

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मुंबई: गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के बाद अब महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों ने भी आरक्षण को लेकर आंदोलन शुरु कर दिया है। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के हिंसक प्रदर्शन होने की खबरे आ रही हैं। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और महाराष्ट्र के कई अन्य इलाकों में  प्रदर्शनकारियों ने पथराव व आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रुख अपनाते हुए बसों को निशाना बनाया है, हाईवे पर गाड़ियों को रोका गया है। कई इलाकों में दुकानों पर जबरदस्ती ताला मरवाया गया। इस दौरान पथराव के चलते एक सिपाही की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य बुरी तरह घायल हो गये हैं।  मराठा क्रांति मोर्चा अपनी मांगों को लेकर पूरे राज्यभर में आंदोलन कर रहा है। आइए, जानते हैं, क्या है मराठा समुदाय की प्रमुख मांगें..

 

क्या हैं मराठा समुदाय की मांगें?

दरअसल, मराठा समुदाय महाराष्ट्र में ओबीसी दर्जे की मांग कर रहा है। समुदाय के नेताओं ने मराठाओं को ओबीसी श्रेणी में शामिल किये जाने की शर्त रखी है। नेताओं का कहना है कि अगर बिना ओबीसी श्रेणी में शामिल किए, उन्हें आरक्षण दिया जाता है तो फिर ये मामला अदालती चक्करों में फंस जाएगा। क्योंकि राज्य में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत के ऊपर होते ही मराठा आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। फिलहाल, संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी भी राज्य में 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण देना संभव नहीं है।

त्वरित समाधान चाहता है मराठा समुदाय

मराठा नेताओं के मुताबिक, सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लाकर मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में ला सकती है। लेकिन उनकी नियत ऐसा करने की नही लग रही है। हांलाकि बताया जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग आयोग इस दिशा में काम कर रहा है। उधर, मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता विनोद पाटिल ने सीएम को चिट्ठी लिख कहा है कि अगर सरकार एक दिन के अन्दर अध्यादेश जारी कर इस मामले का हल नहीं करता है, तो आंदोलन और भी बड़े स्तर पर जारी रहेगा।

नौकरी और शिक्षा में भी मिले आरक्षण- मराठा समुदाय

ओबीसी श्रेणी में सामिल कर आरक्षण देने के अलावा मराठा समुदाय ये भी मांग कर रहा है कि एससी/एसटी की तरह उन्हें भी सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया जाय। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की कुल 33 फीसदी आबादी है। इसी आधार पर ये समुदाय को आरक्षित किए जाने की मांग कर रहे है।

कोर्ट ने 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण पर लगाई थी रोक

इसके पहले हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के 2014 के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों मे 16 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि कुल आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला हैं कि मराठा समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार है।

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