मातृत्व अवकाश लेने से मना नहीं किया जा सकता

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भोपाल:  गांधी बालिका छात्रावास में संविदा पर कार्यरत सहायक वार्डन सुनीता डंडोतिया ने मातृत्व अवकाश के लिए 10 दिन की छुट्टी ली थी। जब ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंची तो कलेक्टर ने सेवा समाप्त कर दी।

जिसे लेकार पीड़िता ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री को मामले की जानकारी दी। लेकिन कोई सुनवाई ही नहीं हुई।

कोर्ट ने सुनी महिला की फ़रियाद

जब महिला अपनी ये फ़रियाद लेकर कोर्ट गई तो कोर्ट ने इसकी सुनवाई की ।

डबल बैंच के मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व न्यायाधीश एसके अवस्थी ने मानव अधिकारों का हवाला देते हुए महिला को नौकरी से हटाने के फैसले को गलत ठहराया।  कोर्ट ने कहा मां बनना महिला का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए उसे मां बनने के बाद नौकरी से निकालना गलत है। साथ ही कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य होने के नाते विश्व मानव अधिकारों को मानने के लिए हम प्रतिबद्ध है। कोर्ट ने कहा शासकीय, अर्द्धशासकीय और निगम मंडलों में कार्यरत महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश लेने से मना नहीं किया जा सकता।

 

 

 

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