जब तक केंद्र में रहेगी बीजेपी की सरकार, राज्यसभा में वापसी नहीं करेंगी मायावती

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पटना: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव के राज्यसभा सदस्यता लेने का ऑफ़र को ठुकरा दिया है। दरअसल, तेजस्वी यादव ने मायावती को राजद के कोटे पर राज्यसभा सीट ऑफर की थी। इस बारे में जानकारी देते हुए तेजस्वी यादव ने बताया कि मायावती का कहना है कि जबतक केंद्र में भाजपा सरकार रहेगी और सदन में भाजपा बहुमत में रहेगी तबतक वह राज्यसभा नहीं जायेंगी।

पटना में रविदास जयंती के मौके पर बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव कई बार मायावती को बिहार से अपने समर्थन से राज्यसभा सदस्य बनाने की बात कह चुके थे, लिहाजा जब हाल में राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हुई तो उन्होंने खुद मायावती को फोन कर सीट ऑफर की। मगर मायावती ने स्पष्ट रूप से मना करते हुए कहा कि जब तक सदन में बीजेपी का बहुमत है तो वो राज्यसभा की सदस्य नहीं बनना चाहेंगी।

तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद पर जो लोग जातिवादी होने का आरोप लगाते हैं, वे वही लोग हैं, जो पिछड़ों को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते। लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही बिहार के गरीबों का भला होना शुरू हुआ।

दरअसल, पिछले साल सहारनपुर में दलित अत्याचार पर सदन में न बोलने देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। उत्तर प्रदेश में बसपा के पास इतने विधायक नहीं है कि मायावती अपने दम पर राज्यसभा सांसद बन सकें।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा में दोबारा वापसी करने के ऑफर को ठुकराने के पीछे मायावती की राजनीतिक रणनीति को सकती है। उनका मानना है कि समय के साथ-साथ मायावती की पार्टी का राजनीति ग्राफ गिरता ही जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के एक भी सांसद नहीं हैं जबकि राज्यसभा में भी महज तीन ही सांसद है। यूपी में हुए बीते विधानसभा चुनाव में भी माया के विधायकों की सख्या 87 से घटकर 19 रह गई है।

ऐसे में मायावती संसद में पहुंचकर तो केंद्र सरकार के खिलाफ कोई प्रभावशाली विरोध नहीं कर सकती लेकिन बाहर वह अपनी पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम कर सकती हैं।

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