इस्तीफा देने के पीछे मायावती की ये बड़ी चाल मोदी भी नहीं समझ पाए, जानकर आप रह जाएंगे हैरान

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नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कल राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अचानक ये बड़ा कदम उठाते हुए सबको चौंका दिया है। अपने राजनीतिक करियर को संवारने के लिए मायावती की ये बड़ी चाल भी मानी जा रही है। वहीं, अपने दलित वोट बैंक को भी बीजेपी के पास से वापस लाने की कोशिश मानी जा रही है। मायावती का ये कदम कितना सही साबित होता है ये तो वक्त बताएगा।

बसपा सुप्रीमो मायावती

विपक्ष इस मुद्दे पर हंगामा कर सकता है

अब बुधवार को भी यही मुद्दा दोनों सदनों में उठ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे पर हंगामा कर सकता है। इसके अलावा राज्यसभा में मॉब लिंचिंग और दलितों के मुद्दे पर बहस भी हो सकती है। लालू प्रसाद यादव ने मायावती को राज्यसभा भेजने का ऑफर दिया है। लालू यादव ने कहा कि मायावती सदन में दलितों की आवाज उठा रही थीं, लेकिन बीजेपी के सदस्यों ने उन्हें बोलने नहीं दिया।

फिर से राजनीति में कदम जमाना चाहती है मायावती

मायावती का राजनीतिक करियर धीमे-धीमे खत्म होता जा रहा है। लगातार चुनावों में मिल रही हार से झुललाईं मायावती ने बड़ा दाव खेला है। मायावती के लिए अपनी पार्टी को केंद्र में लाना जरूरी है क्योंकि वह 2012 के बाद एक के बाद एक विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। यही नहीं, 2014 लोकसभा चुनाव में तो उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। लगातार तीन चुनाव में हारने के बाद वापसी करना आसान नहीं है। नाटकीय अंदाज में इस्तीफा देकर वह 2019 लोकसभा चुनाव के लिए नए सिरे से शुरुआत कर रही हैं।

क्या हुआ था सदन में

मंगलवार की सुबह संसद में कार्यवाही शुरू होते ही सरकार पर आरोपों की झड़ी लगी। जवाब सरकारी पक्ष की ओर से भी आया। राज्यसभा में तब सनसनी फैली जब मायावती इस्तीफे की धमकी दे दी। सहारनपुर दंगे के बाबत उपाध्यक्ष ने उन्हें कुछ मिनटों में भाषण खत्म करने को कहा। वक्त गुजरा तो घंटी बजाकर उन्हें इसकी याद दिलाई गई। मायावती आपा खो बैठीं। उन्होंने तैश में उपसभापति पर जमकर बरसते हुए कहा, ‘जब आप मुझे सदन में बोलने नहीं देते हैं तो मैं इस्तीफा दे देती हूं।’ उसी अंदाज में वह सदन छोड़कर चली गईं।

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