बाबा साहेब का नाम बदलने से भड़कीं मायावती, कहा-सस्ती राजनीति कर रही बीजेपी

लखनऊ। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम बदलने जाने के बाद सियासत शुरू हो गई है। सभी विपक्षी दल इस मामले को लेकर योगी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इसी कड़ी में बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी सरकार हमला करते हुए इसे बीजेपी की सस्ती राजनीति करार दी है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि जब महात्मा गांधी को मोहनदास करमचंद गांधी और नरेंद्र मोदी को नरेंद्र दामोदर दास मोदी के नाम से नहीं लिखा जाता तो बाबा साहेब के नाम के साथ क्यों छेड़छाड़ की जा रही है।

मायावती

मायावती ने कहा कि बीजेपी अब ओछी राजनीति पर उतर आई है। बीजेपी का दलित प्रेम सिर्फ दिखावा है। इससे उन्हें सस्ती लोकप्रियता मिल जाती है जबकि देश में बाबा साहब के अनुयायियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भीमवराव अंबेडकर खुद को बीआर अंबेडकर ही लिखते थे। उन्होंने जब कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तो भी बीआर अंबेडकर ही लिखा था।

मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास अम्बेडकर जैसा नाम नहीं इसलिए वो उनके नाम पर राजनीति कर रहें हैं। उनका एजेंडा सिर्फ वोट बटोरने का है। आपको बता दें कि अब सभी सरकारी दस्तावेजों में आधिकारिक तौर पर डॉ बीआर अंबेडकर के साथ उनका मीडिल नेम ‘रामजी’ का इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार ने ये फैसला राज्यपाल राम नाईक के सुझाव पर लिया है। राम नाईक का कहना था कि अंबेडकर महाराष्ट्र से ताल्लुकात रखते थे, लेकिन कभी भी उनके नाम के साथ रामजी नहीं जोड़ा गया। राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि अंबेडकर के नाम के साथ राम जी न जोडकर हम उनका अधूरा नाम लेते हैं।

राम नाईक ने ये भी कहा है कि मौजूदा समय में हम बाबा साहेब अम्बेडकर का नाम लिखते हैं वो भी गलत है। उनका सही नाम और पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर है, इसलिए इसे बदलना चाहिए। बुधवार (28 मार्च) को यूपी सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम नाम बदलकर डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर करने के लिए सभी विभागों और इलाहाबाद-लखनऊ की सभी हाई कोर्ट की बेंचों को आदेश जारी किया है। अब इस आदेश के बाद सभी सरकारी विभागों और दस्तावेजों में अब अम्बेडकर के नाम के साथ राम जी लगाना अनिवार्य हो गया।

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