मेडिकल हिस्ट्री में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट में ना हो देरी इसलिए ड्रोन से हुई डिलीवरी

नई दिल्ली : आपने इंसानों को एक जगह से दूसरी जाने के लिए हवाई जहाज का उपयोग करते देखा होगा लेकिन मेडिकल इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि एक किडनी को ट्रांसप्लांट रोगी तक एक ड्रोन द्वारा पहुंचाया गया। इस ड्रोन को उड़ान से पहले विमानन नियामकों से विशेष मंजूरी दिलवाई गई। इसने 19 अप्रैल को दोपहर 1:00 बजे के करीब उड़ान भरी। इस दौरान ये ड्रोन अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले 10 मिनट के सफर में 400 फीट की ऊंचाई तक हवा में रहा।

इस ड्रोन को उच्च तकनीक और विशेष डिजाइन के साथ बनाया गया है। जिस महिला के ट्रांसप्लांट के लिए इस ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था वो बाल्टीमोर की रहने वाली थी और पिछले 8 सालों से डायलिसिस की समस्या से पीड़ित थी। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के डॉक्टर जोसेफ स्काला ने सर्जनों की एक टीम के साथ महिला की सफल सर्जरी को अंजाम दिया और कहा कि ड्रोन डिलीवरी से ऑपरेशन करने में मदद मिली अन्यथा डिलीवरी देर से होने के ऑपरेशन में दिक्कतें भी आ सकती थी।

एएफपी से बातचीत के दौरान डॉक्टर स्काला ने बताया कि, अब इस तकनीक को 30 या 100 मील तक लेकर जाया जा सकता है। इस ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण बात ये रही कि हम ट्रांसप्लांटेशन और ट्रांसपोर्टेशन की वर्तमान प्रणाली में ड्रोन तकनीक को लागू करने में सक्षम रहे। अंग ट्रांस्पलांटेशन की वर्तमान पद्धति में चार्टर्ड और कमर्शियल उड़ानों का उपयोग शामिल है जिसके परिणामस्वरूप इलाज में अक्सर देरी होती है।

ऐसे में परिवहन की लागत लगभग $ 5,000 है। अगर ड्रोन डिलीवरी दुनिया भर के अस्पतालों के लिए उपलब्ध हो जाए तो ये एक वरदान के रूप में काम कर सकती है क्योंकि लगभग 1.5% मृतकों के अंग अपने इच्छित गंतव्यों तक समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। जबकि चार प्रतिशत शिपमेंट में देरी करते हैं। सर्जरी के बाद स्काला ने बताया कि उन्हें अन्य प्रणालियों की तुलना में ये उबर जैसी सेवा वाली प्रणाली ज्यादा अच्छी लगी और ये कम खर्चीली भी साबित हो सकती है।

Related Articles