बाप रे बाप, ऐसे तो बर्बाद हो जाएगा दवा कारोबार…जानिये क्यों !

pharmaगोरखपुर। जनपद के दवा कारोबारी भारत सरकार के नये फरमान से सकते में आ गये हैं। आर्थिक नजरिये से पिछड़े गोरखपुर के लिए मेडिकल स्टोर का धंधा जीविकोपार्जन का एक बड़ा स्रोत है। लेकिन अब नये नियमों के एलान से यह धंधा भी मंदा पड़ सकता है। भारत सरकार ने नई अधिसूचना जारी करते हुए ड्रग लाइसेंस की फीस और पेनाल्टी में सीधे दस गुना इजाफा कर दिया है।

इसका सीधा असर गोरखपुर के लगभग 12 हजार मेडिकल व्यवसायियों पर पड़ने जा रहे है। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि नई अधिसूचना के लागू होते ही लगभग 8 हजार छोटे व्यापारियों का धंधा बंद हो जाएगा। बाजार में टिकेंगे सिर्फ वही जिनके पास मोटी पूंजी है।

वर्तमान कानून के मुताबिक 3000 रुपये में ड्रग लाइसेंस मिलने का प्रावधान है। हांलाकि लाइसेंस के लिए अधिकारी कम से कम 25-45 हजार रुपये तक लेते हैं। व्यापारियों को यह भय भी सताने लगा है कि जब तीन हजार की जगह 30 हजार से ऊपर की वसूली होती है तो 30000 की जगह तीन लाख न देने पड़ जाएं। नया कानून लागू होने के बाद ड्रग लाइसेंस का रिन्यूअल कराने के लिए लाखों रुपये देने पड़ेंगे। जो व्यापारी पूंजीवाले हैं वही इस प्रतिस्पर्धा में टिक पाएंगे।

रिन्यूअल न कराने पर 1000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेनाल्टी लगने का नियम है। अब पेनाल्टी की राशि भी दस गुना हो जाएगी। यानी अगर छह महीने तक रिन्यूअल नहीं हुआ तो रिन्यूअल फीस के दोगुना पेनाल्टी की राशि भरनी पड़ेगी। बीते 29 दिसम्बर को जारी अधिसूचना के इन नियमों से दवा व्यापारी दुखी हैं और खासा आक्रोशित भी। शीघ्र ही गोरखपुर की सड़कों पर यह आक्रोश नजर आ जाएगा।

अत्याचार ही हद है

दवा विक्रेता समिति थोक और फुटकर के संयुक्त मंत्री योगेन्द्र दूबे और आलोक चौरसिया नये अधिसूचना को अत्याचार की हद मानते हैं। उनका कहना है कि दवा विक्रेता समिति सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध करेगी। सरकार के नये नियम लागू हो गये तो दवा का व्यापार नष्ट हो जाएगा। वैसे ही थोक दुकानदारी में फार्मासिस्ट के नियम से खासा परेशानी झेलनी पड़ रही है। दवा की दुकानों के सापेक्ष फार्मासिस्ट की संख्या कम होने के कारण आनलाइन पंजीकरण में थोक और फुटकर व्यापारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है। नया ड्रग लाइसेंस बनवाना अब आसान नहीं रहा।

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