नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय में होगी बैठक

नई दिल्ली, एजेंसी। १९७१ में शुरू हुए नक्सलबाद की प्रवृति हमेशा ही हिंसा को बढ़ावा देना रही है। जिसकी खामियों को आज भी बहुत से राज्य भुगत रहे है। प्रभावित इलाकों से विस्‍थापित आदिवासियों के पुनर्वास को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय और जनजाति मंत्रालय के साथ बैठक करेगा। जिसमे आदिवासियों को लेकर चर्चा की जाएगी।

केंद्रीय जनजाति मंत्रालय इसके लिए सर्वे करेगा जिसके जरिए 15 साल पहले नक्‍सली हिंसा के कारण छत्‍तीसगढ़ से आंध्र प्रदेश जाने वाले आदिवासियों की पहचान की जाएगी। NCST ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और जनजाति मंत्रालय के साथ छत्‍तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीशा और महाराष्‍ट्र सरकार को पत्र भेजकर विस्‍थापित आदिवासियों के हालात की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पांचों राज्‍यों के प्रतिनिधियों से नई दिल्‍ली में मंगलवार को होने वाली बैठक में उपस्‍थित रहने को कहा है। जिससे किसभी राज्यों में निवास कर रही जनजातियोंके बारे में जाना जा सके।

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि छत्तीसगढ़ से नक्सली हिंसा के कारण करीब 30,000 लोग पलायन कर गए हैं। जो देश के अलग अलग राज्यों में निवास करने के लिए गए। जिनमे अधिकतर लोग ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की बस्तियों में रह रहे हैं। ये आदिवासी अत्यंत विषम परिस्थितियों में रह रहे हैं। इन्हें न तो पेयजल मिल रहा और न ही बिजली की सुविधा दी जा रही है। न्यूनतम मजदूरी मिलती है लेकिन न तो राशन कार्ड है और न ही वोटर आइडी। और तो और राज्यों ने उन्हें आदिवासी की मान्यता भी नहीं दी है। वन भूमि पर इन्हें अधिकार नहीं है और वे सामाजिक सुरक्षा लाभ से वंचित हैं। ऐसे में सरकार इनके लिए हर संभव प्रयास करेगी। जिनसे कि इन आदिवासियों की जिंदगी में भी सुधार आये।

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