युवा मामलों के मंत्रालय ने भारतीय तीरंदाजी संघ की मान्यता की बहाल

केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय ने भारतीय तीरंदाजी संघ की मान्यता बहाल कर दी है। संघ की मान्यता बहाल होने पर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन मुंडा ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

नई दिल्ली: केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय ने भारतीय तीरंदाजी संघ की मान्यता बहाल कर दी है। संघ की मान्यता बहाल होने पर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन मुंडा ने प्रसन्नता व्यक्त की है। मुंडा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि अब भारत पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाएगा। साथ ही तीरंदाजों के लिए एक नये उत्साह का संचार होगा।

उन्होंने कहा कि यह मान्यता सच्चाई की जीत भी है। तमाम अड़चनों के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार भारतीय तीरंदाजी संघ का चुनाव संपन्न हुआ और उसके बाद विश्व तीरंदाजी संघ ने मान्यता बहाल कर दी। उन्होंने कहा कि कल से टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय टीम की चयन प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है और भारतीय तीरंदाजी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

खेल मंत्रालय ने तीरंदाजी संघ की मान्यता

खेल मंत्रालय ने तीरंदाजी संघ की मान्यता सात दिसम्बर 2012 को वापस ले ली थी क्योंकि मंत्रालय के अनुसार तीरंदाजी संघ के चुनाव राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के आधार पर नहीं हुए थे। यह मामला उसके बाद से दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन था। तीरंदाजी संघ का चुनाव इस साल 18 जनवरी को हुआ था जिसके लिए खेल मंत्रालय ने पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया था। अर्जुन मुंडा को 2020-24 तक के लिए अध्यक्ष चुन लिया गया था जबकि प्रमोद चन्दूरकर महासचिव और राजेंदर सिंह तोमर कोषाध्यक्ष चुने गए थे।

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चुनाव खेल संहिता के प्रावधानों के अनुसार नहीं पाया

हालांकि उपाध्यक्ष पद पर पीबी वार नोंगबरी और संयुक्त सचिव पद पर केबी गुरुंग और क़ुमजुम रिबा का चुनाव खेल संहिता के प्रावधानों के अनुसार नहीं पाया गया है। इसलिए तीरंदाजी संघ को सलाह दी गयी है कि इन अधिकारियों को अपना पद छोड़ने के लिए कहे और इन पदों के लिए नए सिरे से चुनाव कराये।

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