पश्चिम बंगाल में मोदी और ममता की सियासी लड़ाई, TMC-BJP दोनों को होगा फायदा

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नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव 2019 का राजनीतिक केंद्र पश्चिम बंगाल बनता जा रहा है. सीबीआई की टीम शारदा चिटफंड मामले में रविवार को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर छापा मारने पहुंची तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ढाल बनकर सामने आ गईं. इस तरह उन्होंने इस घमासान को नरेंद्र मोदी बनाम ममता बनर्जी के बीच का बना दिया है. माना जा रहा है कि इसमें सियासी लड़ाई में बीजेपी और टीएमसी दोनों को अपने-अपने सियासी फायदे नजर आ रहे हैं.

दरअसल 2014 के बाद से पश्चिम बंगाल में बीजेपी का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ा है. लेफ्ट और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी मुख्य विपक्षी दल बन चुकी है. लोकसभा चुनाव में 2019 में पार्टी राज्य पर नजरे गढ़ाए हुए है. सूबे की कुल 42 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 22 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. बीजेपी ममता बनर्जी के दुर्ग बंगाल में कमल खिलाने की कवायद में हर संभव कोशिश में जुटी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी नेता लगातार बंगाल की सियासत में सक्रिय है. ममता बनर्जी के निशाने पर एक समय लेफ्ट हुआ करता था, लेकिन 2014 के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और लेफ्ट के बजाय बीजेपी को निशाने पर लेना शुरू कर दिया. हाल ही के दिनों में देखेंगे तो ममता बनर्जी ने बीजेपी की रथ यात्रा को निकलने नहीं दिया. इसके अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बंगाल में हेलीकाप्टर को उतरने की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद उन्हें मोबाइल के जरिए रैली को संबोधित करना पड़ा.

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