पर्रिकर को मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अंतिम यात्रा देख हुई भावुक स्मृति ईरानी

0

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर अब हमारे बीच नहीं रहें लेकिन उनके सादगी भरे जीवन के चलते वह लोगों के दिल में हमेशा रहेंगे … लम्बे समय से बीमार चल रहे मनोहर पर्रिकर अपनी ज़िन्दगी की जंग हार गए 63 की उम्र में पूर्व रक्षा मंत्री ने अंतिम सांस ली। पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर के स्वास्थ्य में पिछले एक साल से उतार-चढ़ाव होता रहा है। बीते दो दिन से उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। इंजीनियर रहे पर्रिकर आईआईटी बॉम्बे के स्टूडेंट थे। लेकिन बहुत जल्द ही उन्हें समझ आ गया था कि वे मशीनों के बीच उलझने के बजाए सामाजिक क्षेत्र में काम करेंगे। अंतिम दर्शन के लिए उनकी पार्थिव देह घर से भाजपा कार्यालय से लाई गई थी। इसके बाद इसे कला अकादमी में भी कुछ देर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा पहुंचकर पर्रिकर को श्रद्धांजलि दी। शाम पांच बजे कैंपल स्थित एसएजी मैदान में अंतिम संस्कार किया जाएगा। पर्रिकर का एक साल से पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज चल रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पर्रिकर आधुनिक गोवा के निर्माता थे, उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया। उनके फैसलों ने भारतीय रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया।

-मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि देते समय भावुक हुईं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी।

-कला अकादमी में प्रधानमंत्री मोदी ने पर्रिकर को श्रद्धांजलि दी।

-पर्रिकर की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा पहुंचे।

-राहुल ने कर्नाटक में अपनी जनसभा से पहले पर्रिकर को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा।

पत्नी का भी कैंसर से निधन हुआ था
पर्रिकर की पत्नी मेधा का 2001 में कैंसर से निधन हो गया था। उनके दो बेटे उत्पल और अभिजात हैं। उत्पल ने अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अभिजात कारोबारी हैं।

पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले देश के 18वें मुख्यमंत्री
पर्रिकर देश के 18वें ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनका पद पर रहते हुए निधन हुआ। उनसे पहले तमिलनाडु की सीएम जयललिता, जम्मू-कश्मीर के शेख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सईद, आंध्रप्रदेश के वाईएस राजशेखर रेड्डी का निधन भी पद पर रहते हुए ही हुआ था। इनके अलावा गोपीनाथ बोरदोलोई (असम), रविशंकर शुक्ल (मध्यप्रदेश), श्रीकृष्ण सिंह (बिहार), बिधानचंद्र राय (प.बंगाल), मरुतराव कन्नमवार (महाराष्ट्र), बलवंत राय मेहता (गुजरात), सीएन अन्नादुरई (तमिलनाडु), दयानंद बंडोडकर (गोवा), बरकतुल्ला खान (राजस्थान), एमजी रामचंद्रन (तमिलनाडु), चिमनभाई पटेल (गुजरात), बेअंत सिंह (पंजाब) और दोरजी खांडू (अरुणाचल प्रदेश) का निधन भी पद पर रहते ही हुआ।

loading...
शेयर करें