अग्निपरीक्षा का दिन हुआ तय, देखिए क्या कहते हैं आंकड़ें बचेगी या गिरेगी मोदी सरकार

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नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो गया। शुरुआत काफी हंगामेदार रही। ये सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया, जिसे सदन की सभापति सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया। 20 जुलाई यानी शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में इसपर चर्चा की जाएगी। वहीं बीजेपी ने भी विपक्ष के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

संसद

इसके लिए बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है। बीजेपी ने शुक्रवार को होनी वाली चर्चा में सभी सांसदों का मौजूद रहना अनिवार्य कर दिया है। अगर कोई सांसद मौजूद नहीं होता है तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा की कार्रवाई ही हंगामे के साथ हुई। सरकार इस सत्र में करीब 46 विधेयकों को पास कराना चाहती है जिसमे तीन तलाक, भगौड़ा आर्थिक अपराधी और स्टेट बैंक निरसन जैसे कई अहम विधेयक शामिल हैं।

अविश्वास प्रस्ताव की मांग 

वहीं सत्र की शुरुआत होते ही लिंचिंग, आंध्र प्रदेश जो विशेष राज्य का दर्जा देने सहित कई मुद्दों को लेकर संसद में हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया टीडीपी सहित कई पार्टियों ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बात कही। विपक्ष की इस मांग को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया। मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव की बात कही गई है जिसे सरकार ने सहमती से स्वीकार कर लिया है।

शुक्रवार को होनी है चर्चा 

अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में शुक्रवार को राज्यसभा में सोमवार को बहस होगी। इससे पहले भी बजट सेशन में कई पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव की मांग की थी लेकिन हंगामे की वजह से स्पीकर ने नामंजूर कर दिया था। हालाँकि इस अविश्वास प्रस्ताव से सरकार को कोई खतरा नहीं है। क्योंकि सरकार के पास लोकसभा में 312 सांसद हैं। राजनैतिक विशेषज्ञों की मानेतो विपक्ष को अच्छी तरह से पता है कि बीजेपी के पास पर्याप्त बहुमत है, सरकार जाएगी नहीं लेकिन फिर भी प्रस्ताव लाने का मतलब साफ है कि राजनैतिक मुद्दों को उछाल चुनाव की रणनीति बनायीं जा रही है।

बीजेपी के पास बहुमत    

उल्लेखनीय है कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 है। इसमें 9 सीट खाली है। यानि इस वक्त लोकसभा के पास कुल 534 सांसद हैं। इस तरह सरकार बनाने के लिए बीजेपी को सिर्फ 268 सीटें चाहिए। जबकि बीजेपी के पास खुद 272 सांसद हैं। बाकी अन्य पार्टियां के सदस्य भी उसके साथ है। फिलहाल बीजेपी सरकार को कोई खतरा नहीं है।

इन अन्य दलों का भी समर्थन बीजेपी के पास है…

शिवसेना 18, एलजेपी 6, अकाली दल 4, आरएलएसपी 3, अपना दल 2, जेडीयू 2 और एनआर कांग्रेस, पीएमके, एनपीपी, एनडीपीपी, एसडीपी के एक-एक सांसद हैं।

इस तरह सरकार को कोई खतरा नहीं लेकिन अगर किसी और पार्टी ने उनका साथ छोड़ा तो विपक्ष की बड़ी जीत साबित होगी। क्योंकि विपक्ष आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी दलों को लामबंद करने की कोशिश में जुटी है।

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