किसानों के आंख में धूल झोक रही मोदी सरकार- रामपाल जाट

नई दिल्ली: किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्र सरकार पर किसानों के आंखों में धूल झोंकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मूल्य समर्थन नीति के तहत प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान की मार्गदर्शिका के कारण सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, रामतिल, मूंग, उड़द, अरहर जैसी तिलहन एवं दलहन की उपजों की कुल उत्पादन में से 75 प्रतिशत उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के बाहर कर दिया हैI

रामपाल जाट ने कहा किसानों की आय घटने की स्तिथि

राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने अपने बयान में कहा कि इससे किसानो की आय घटने की स्थिति आ गयी I इसके उपरांत भी प्रधानमंत्री द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य को चालू रखने की निरंतर घोषणा की जा रही है I इतना ही नहीं तो किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चल रही वार्ता में लिखित आश्वासन देना भी प्रचारित किया जा रहा है I यह किसानों की आँख में धूल झोंकना है।

उन्होंने कहा कि इस मार्गदर्शिका की केंद्र सरकार द्वारा पालना नहीं करने से अकेले राजस्थान में चना एवं मूंगफली में 117 करोड़ रुपये के घाटे की सम्भावना बनी हुई है वहीं केंद्र सरकार द्वारा गणितीय भूल को सुधारने के स्थान पर त्रुटियों की पुनरावृति के कारण किसानो को यह घाटा होगा I

मूंगफली की खरीद में जबरदस्त घाटा

उन्होंने कहा कि 18 नवंबर से मूंगफली की खरीद चल रही है I मूंगफली के कुल उत्पादन में से 25 प्रतिशत से कम खरीद की मात्रा के निर्धारण के कारण 61,76,92,000 रुपए के घाटे की संभावना का आंकलन किया गया है I

केंद्र सरकार द्वारा 25 प्रतिशत के स्थान पर 20.23 प्रतिशत के गलत निर्धारण के कारण ही राज्य में 7,72,115 क्विंटल मूंगफली की खरीद कम होगी I अभी मूंगफली के न्यूनतम समर्थन मूल्य 5575 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में प्रचलित मूल्य 4400-4500 रुपये के लगभग हैं। इसके अनुसार एक क्विंटल पर करीब 800 रुपए का घाटा होगा।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार चने की खरीद भी 22.93 प्रतिशत की गई थी। आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि विपणन वर्ष 2021-22 की रबी उपजो की मूल्य नीति में राजस्थान में 24.9 प्रतिशत चना खरीद का उल्लेख किया गया है।

‘दूसरे राज्यों के किसानों के साथ हो रहा भेदभाव’

दूसरी ओर राजस्थान सहित अन्य राज्यों द्वारा 25 प्रतिशत से अधिक चना ख़रीद के प्रस्तावो को तो स्वीकार नहीं किया गया, जबकि इसी अवधि में मध्यप्रदेश उपचुनाव जीतने के लिए गोपनीय ढंग से 27.1 प्रतिशत चना खरीदा गया है। यह अन्य राज्यों के किसानों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार है।

इसे छुपाने के लिए दुराव-छिपाव की नीति अपनाई गई है। भेदभाव जनित ऐसे अन्याय को रोकने के लिए केंद्र सरकार से “श्वेत पत्र” प्रसारित करने का आग्रह किया गया है।

सरकार का इरादा 25 प्रतिशत तक की खरीद को समाप्त करना

उल्लेखनीय है कि चना खरीद संबंधी केंद्र सरकार द्वारा 25 प्रतिशत खरीद के लक्ष्य की मात्रा की त्रुटि को सुधारने के लिए किसानों ने महीनों तक सड़कों पर अपने चने भरे हुए हजारों ट्रैक्टरों के साथ आंदोलन किया।

उन्होंने कहा कि होना तो यह चाहिए था कि केंद्र सरकार दाने-दाने की खरीद के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान की मार्गदर्शिका में तिलहन एवं दलहन के 75 प्रतिशत उत्पादों को खरीद की परिधि में लाने के लिए 25 प्रतिशत से अधिक खरीद के प्रतिबंध को समाप्त करती।  सरकार तो 25 प्रतिशत तक की खरीद को भी रोकने पर तुली हुई है।

इस संबंध में केंद्र एवं राज्य के कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री को भेदभाव रहित – पारदर्शी नीति अपनाने के लिए ध्यानाकर्षण के लिए एक माह पूर्व पत्र प्रेषित किया था तब भी इस दिशा में अभी तक कोई सार्थक कार्यवाही नहीं हुई I

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