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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर पहली बार मोदी सरकार बैकफुट पर

नई दिल्ली : अच्छे दिन का वादा करके सत्ता में आई बीजेपी (BJP) को अब वही वादे गले की फांस बन हैं। देश में महंगाई (Pricke Hike) और बेरोजगारी (Unemployment) चरम पर हैं। एक तरफ जहां देश के युवा प्रधानमंत्री से रोजगार मांग रहें हैं। तो वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महगाई की मार झेल रही जनता मोदी सरकार से महगाई काम करने की मांग कर रही है।

महगाई और बेरोजगारी से सत्ता बनती और बिगड़ती है यह बीजेपी से ज्यादा कोई भी पार्टी नहीं समझ सकती है। क्योकि इसी को मुद्दा बनाकर बीजेपी 2014 में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। लिहाजा मोदी सरकार (Modi government) जनता के बढ़ते हुए आक्रोश को देखते हुए पेट्रोल (petrol) और डीजल (diesel) की कीमतों में कटौती करने पर विचार कर रही है।

वित्त मंत्रालय ने शुरू किया मंथन

सरकार इस बात पर चर्चा शुरू कर दी है कि केंद्र और राज्य सरकार पर अधिक दबाव के बिना किस तरीके से करों में कटौती की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के अधिकारियों ने इस पर मंथन करना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्रालय कीमतों में कटौती के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच सामंजस्य बना रही है। बता दें कि वर्तमान में, दिल्ली में पेट्रोल (petrol) की कीमतें 91.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल (diesel) 81.47 रुपये प्रति लीटर हैं।

सूत्रों के अनुसार उत्पाद शुल्क कटौती के अलावा, मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्यों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। इसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही कहा था कि इस समस्या का समाधान खोजने का एकमात्र तरीका यह है कि केंद्र और राज्यों को बातचीत करनी चाहिए। वहीं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वित्त मंत्री से अपील की थी कि डीजल और पेट्रोल की कीमतें आम लोगों को नुकसान पहुंचा रही हैं और सीतारमण को कीमतें नीचे लाने के लिए राज्यों के साथ बातचीत करनी चाहिए।

 एक साल के भीतर केंद्र ने दो बार बढ़ाया टैक्स

पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा था कि डीजल और पेट्रोल की कीमतों पर लागत का असर पड़ता है। इससे सिर्फ कार और बाइक का उपयोग करने वालों पर ही असर नहीं पड़ता है, बल्कि उच्च ईंधन की कीमतें विनिर्माण, परिवहन और अन्य पहलुओं पर भी प्रभाव डालती हैं। उन्होंने कहा था कि मुझे यकीन है कि केंद्र सरकार समन्वित तरीके से सकारात्मक निर्णय लेगी।

बता दें कि कोरोनवायरस वायरस महामारी की वजह से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है, केंद्र ने पिछले 12 महीनों में पेट्रोल और डीजल पर दो बार टैक्स बढ़ा दिया है। जिस वजह से अनतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी उपभोक्ताओं को इसका फायदा नहीं हुआ।

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