मोदी-पोम्पिओ मुलाकात: वो चार मुद्दे जिन पर टिकी हैं भारत और अमेरिका की दोस्ती

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो अपनी भारत यात्रा के दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. बीते दिनों भारत और अमेरिका के बीच शुरू हुए व्यापार तनाव के बीच उनकी इस यात्रा को अहम माना जा रहा है. चार ऐसे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा हो सकती है.

ट्रेड वॉर : बीते दिनों भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव बना हुआ है. ट्रम्प अक्सर हार्ले डेविडसन बाइक सहित कई अमेरिकी उत्पादों पर उच्च टैरिफ का हवाला देते देते रहे हैं. ट्रंप ने भारत को टैरिफ किंग करार दिया था. हालही में अमेरिका से जीएसपी का दर्जा भी छीन लिया. इसके जवाब में 16 जून को भारत ने इसके बदले में कई 28 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगा दिया. अपनी यात्रा के दौरान पोम्पिओ अपने भारतीय समकक्ष के साथ जीएसपी, डेटा स्थानीयकरण और अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापार बाधाओं सहित विषयों पर चर्चा कर सकते हैं.

तेल की कीमतें : कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और भारतीय उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव की संभावना अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल रिचर्ड पोम्पिओ की यात्रा के दौरान चर्चा में रहने की संभावना है. यह यात्रा फ़ारस की खाड़ी में ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा उत्पादन प्रतिबंधों के साथ बढ़ते तनाव को लेकर हो सकती है. भारत 2018-19 में 23.5 मिलियन टन के आयात के साथ ईरान के शीर्ष तेल खरीदारों में शामिल था. हालांकि चीन और भारत सहित आठ देशों को ईरानी तेल आयात पर अमेरिका की सशर्त छूट दी थी. भारत ने ईरान से सभी तेल आयातों को रोक दी है.

चूंकि भारत अपनी जरूरत के 80% से अधिक कच्चे तेल और 18% प्राकृतिक गैस का आयात करता है. इसलिए उच्च ऊर्जा कीमतें महंगाई बढाती हैं और देश की आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाती हैं. देश के सबसे बड़े रिफाइनर इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने पहली बार नॉर्वे के इक्विनोर एएसए और अल्जीरिया की राज्य ऊर्जा कंपनी सोनटैर्च से 2019-20 के लिए कुल कच्चे तेल के 4.6mt के दो टर्म अनुबंधों को शामिल किया है. भारत अमेरिका से तरल प्राकृतिक गैस और तेल का स्रोत भी तैयार कर रहा है, भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी शेल गैस परिसंपत्तियों में 4 बिलियन डॉलर का निवेश किया है.

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