भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बना कांग्रेस का यह कदम, टेंशन में मोदी-शाह की जोड़ी

नई दिल्ली। बीते कई महीनों से सत्तारूढ़ भाजपा और मजबूत विपक्ष के तौर पर अपनी दावेदारी पेश करने वाली कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। कांग्रेस जहां साल 2019 को अपने उज्ज्वल भविष्य के रूप में देख रही है। वहीं कांग्रेस के बढ़ते कदम भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदसौर में भाजपा को निशाने पर लेते हुए ‘किसान कार्ड’ खेला, उसकी वजह से पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों के माथे पर चिंता की सिलवटें साफ़ दिखाई दीं। शायद यही कारण कारण है कि दोनों ने एक साथ मध्यप्रदेश का रुख करने का मन बनाया है।

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भाजपा और मजबूत विपक्ष

बता दें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं लाई है वहीं भाजपा शासित कई राज्यों ने किसानों के लोन तक माफ किए हैं।

इसी कड़ी में पिछले दिनों कैबिनेट ने गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा भी दिया है, लेकिन किसानों का मोदी सरकार के प्रति गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।

शायद यही वजह है कि किसान देश भर में कहीं न कहीं आंदोलन कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी भी अन्नदाताओं को भुनाने में जुटी है।

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मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी के छह जून को थी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता और चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

चिंता इस बात की किसानों की हित के लिए काम किए जाने के बाद भी क्यों सरकार के प्रति किसानों का मोहभंग हो रहा है वहीं चुनौती यह है कि किसानों के दर्द को कैसे कम किया जाए। अगर कांग्रेस  इसी तरह से किसानों को लुभाती रही भाजपा के लिए 2019 में बड़ा खतरा बन सकती है।

खबरों के मुताबिक़ जहां 12 जून को अमित शाह जबलपुर पहुंच रहे हैं, वहीं पीएम मोदी 23 जून एमपी में होंगे। माना जा रहा है कि मोदी और शाह के एक साथ यहां पहुंचने की मुख्य वजह रूठे किसानों को मनाना है।

भाजपा में टेंशन का अहसास इस बात से हो जाता है कि कर्जमाफी के साथ-साथ किसानों के लिए अन्य सुविधाएं और योजनाओं का प्रयास करने के बाद भी भाजपा के प्रति किसानों का उग्र प्रदर्शन जारी है।

मंदसौर में किसानों का सरकार के विरोध में किया जाने वाला प्रदर्शन भाजपा के लिए अच्छा इशारा नहीं। शायद इसीलिए अब मोदी और शाह की जोड़ी एक साथ किसानों को मनाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

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इस बात की अहमियत और भी ख़ास इस वजह से हो जाती है, क्योंकि इसी साल के अंत तक मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं।

इस लिहाज से ये माना जा रहा है कि बीते दिनों जिस तरह राहुल गांधी ने किसानों के बीच पहुंचकर यहां उन्हें गले लगाया। अब भाजपा को भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।

बता दें राहुल गांधी ने बीते दिनों मंदसौर में भाजपा सरकार को घेरा और बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उसका जवाब देने के लिए 12 जून को अमित शाह जबलपुर पहुंच रहे हैं।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जून को मध्यप्रदेश में होंगे जहां वह राजगढ़ के मोहनपुरा में बांध सहित दो सिंचाई परियोजना भी शुरू करेंगे।

उम्मीद की जा रही है कि यहां वह जब आम सभा को संबोधित करेंगे। लेकिन राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि राहुल से भाजपा को कड़ी चुनौती मिल रही है और पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार के लिए खतरा भी बन सकती है।

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साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जिस तरह से किसानों में असंतोष बढ़ रहा है ऐसे में किसान भाजपा के मिशन 2019 के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

भाजपा यह सोच रही है कि यदि बंटी हुई कांग्रेस जब मंदसौर में इतने किसानों को एकत्रित कर सकती है तो आने वाले समय में वह किसानों को सरकार के खिलाफ भी कर सकती है।

मंदसौर में जिस तरह से राहुल गांधी ने किसानों को गले लगाया है और लोन माफ किए जाने की बात की है उनकी इन बातों ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के पशीने पर सिलवट ला दी है।

केंद्र सरकार किसानों की नाराजगी को बहुत अच्छे से समझ भी रही है, यही वजह है कि मोदी कैबिनेट ने गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भारी-भरकम पैकेज मंजूर किया है। लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि किसानों की समस्याओं को दूर कैसे किया जाए। बता दें कि इसी साल के अंत तक मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और यह भाजपा के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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