राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय और कनाड़ा के डलहौजी के बीच हुआ एमओयू

मध्यप्रदेश में ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय और कनाड़ा के डलहौजी विश्वविद्यालय के मध्य सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर

ग्वालियर: मध्यप्रदेश में ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय और कनाड़ा के डलहौजी विश्वविद्यालय के मध्य सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से यहाँ के विद्यार्थी अब कृषि शिक्षा में अंतर्राराष्ट्रीय स्तर की उपाधि प्राप्त कर सकेंगे। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. राव ने सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिये बड़े ही गौरव का विषय है कि यहाँ के छात्रों, शिक्षकों तथा वैज्ञानिकों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे। ऐसी उपलब्धि प्राप्त करने वाला देश का दूसरा विश्वविद्यालय बन गया हैं।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने यह सहमति पत्र (एमओयू) एक ऑनलाइन समारोह में डलहौजी विश्वविद्यालय कनाडा के साथ संपन्न किया। अनुबंध कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति. प्रो. एस. के. राव एवं डलहौजी विश्वविद्यालय कनाडा के अध्यक्ष एवं कुलपति डाॅ. दीप सैनी के मध्य किया गया। ऑनलाइन समारोह में कुलपति प्रो. राव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की विभिन्न उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस एमओयू के माध्यम से हम अपने साझा लक्ष्य की ओर मिलजुलकर तेजी से कार्य कर सकेंगे। हम कृषि शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में सफल होंगे। इसके तहत स्नातक के विद्यार्थियों को दोहरी डिग्री का स्वर्णिम अवसर मिलेगा।

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कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में बीएससी एजी की डिग्री

अब छात्र कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में बीएससी एजी की डिग्री लेने बाद अगले दो कनाडा विश्वविद्यालय में कृषि विज्ञान का अध्ययन करेंगे, जिसके बाद उन्हें बीएससी एजी प्लांट साइंस की डिग्री प्रदान की जाएगी। इससे कृषि क्षेत्र में मेधावी छात्रों को आकर्षित किया जा सकेगा। इसके साथ ही कृषि स्नातकों को रोजगार के अवसरों में भी इससे बढ़ावा मिलेगा।

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डाॅ. संजय के. शर्मा ने कहा कि यह अनुबंध आईसीएआर

इस अवसर पर आईडीपी एनएएचईपी के प्रिंसीपल इन्वेस्टिगेटर डाॅ. संजय के. शर्मा ने कहा कि यह अनुबंध आईसीएआर एवं विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से संचालित प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। इस एमओयू से कृषि विद्यार्थियों को बेहतर मौके मिलेंगे एवं इससे एक दूसरे देश की संस्कृति से वे परिचित हो सकेंगे।

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