कानपुर कचहरीकांड में परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, मां-बहनों की बात सुन रो पड़े सभी

बार एसोसिएशन के चुनाव हिंसा

कानपुर कचहरी में बार एसोसिएशन के चुनाव में हिंसा दिखी. इस दौरान एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. वहीं ये दुखों का पहाड़ एक परिवार के लिए जीवन भर का जख्म दे गई. एक मां की गोद सूनी हो गई तो बहनों से राखी बांधने वाली कलाई छिन गई. शुक्रवार की शाम कचहरी में चुनाव रद होने से पहले उपद्रव और तोड़फोड़ हुई और शाम को शताब्दी प्रवेश द्वार के पास फायरिंग में गोली लगने से अधिवक्ता गौतम दत्त की मौत से एक हंसते खेलते परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है. मां और बहनें रो-रोकर बदहवास हो रही हैं तो पिता बेसुध हालत में हैं.

दो बहनों का था इकलौता भाई

बता दें कानपुर के अनवरगंज की फूलवाली गली निवासी सुनील दत्त का चप्पल कारखाना है. उनका बेटा गौतम पहले चप्पल कारोबार संभालता था. कुछ साल पहले उसे वकालत करने का मन बनाया और साल 2015 में गौतम एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. साल 2016 में उसने बार एसोसिएशन में अपना पंजीकरण कराया. गौतम दो बहनों में अकेला था. बड़ी बहन आयुशी दत्ता उर्फ हेमा का विवाह हो चुका है, जबकि हिमानी उर्फ मेघा सबसे छोटी है, हेमा का छह दिसंबर को ही विवाह हुआ था. कचहरी में गोली लगने से गौतम की मौत की खबर मिलते ही बहनें बिलख पड़ीं. दो बहनों में इकलौते भाई की मौत से घर में कोहराम मच गया.

मां बोलीं- खत्म हो गए सारे अरमान

गौतम की मृत्यु के बाद परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. मां बीना दयाल व बहन हिमानी को रो-रोकर बुरा हाल था. हिमानी बार-बार सबसे कह रही थी भाई परमट वाले बाबा का भक्त था. मां बीना ने बड़ी बेटी से जब फोन पर बात की तो दहाड़ें मारकर रोने लगीं. बोली, सब कुछ खत्म हो गया. कितनी उम्मीदें थी कि बेटे को दुल्हा बनते देखूंगी, मगर सारे अरमान धुल गए. बताया जा रहा है कि परिवार गौतम की शादी की कोशिशें कर रहा था. बात तय हो गई थी और फरवरी तक शादी होनी थी.

 

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