मुजफ्फरनगर दंगा 2013 : योगी सरकार आरोपियों के पक्ष में, दंगों से जुड़े सभी 131 मुकदमों को करेगी खत्म

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नई दिल्ली। साल 2013 में यूपी के मुजफ्फरनगर और शामली में भीषण दंगे हुए थे। उस वक्त प्रदेश में मौजूदा अखिलेश सरकार ने इससे जुड़े सभी 131 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमे दर्ज कराए थे। वर्तमान समय की योगी सरकार ने इन मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। इनमे 13 हत्या के मामले व 11 हत्या की कोशिश के केस शामिल हैं। मुजफ्फर नगर में करीब 500 से अधिक लोगों पर दंगा भड़काने के आरोप लगे थे।

दंगाईयों को मिली बड़ी राहत

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस केस से जुड़े दस्तावेजों में पाया गया है कि सभी केस गंभीर अपराध से जुड़े हैं। जिसमें कम से कम सात साल की सजा होती है। ऐसे में धारा 153 ए यानी धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने के आरोप तथा दो मुकदमे सेक्शन 295 पर 16 लोगों पर केस दर्ज हैं। ऐसे में अब खबरों के मुताबिक बीजेपी के जिन लोगों के ऊपर इन दंगों को फैलाने के आरोप लगे थे उनको वापस लिया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक 5 फरवरी को भाजपा सांसद संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक के नेतृत्व में खाप पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें 179 केस का लिस्ट सौंपकर मुकदमों को वापस कराने की मांग की थी। इसके बाद योगी सरकार ने मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की है।

भाजपा सांसद संजीव बालियान का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को सूची सौंपी थी, जिसमें सभी हिंदू थे। बालियान ने कहा कि 850 आरोपी हिंदुओं पर दर्ज 179 केस वापस लेने के लिए मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला था. ये केस मुजफ्फरनगर और शामली में दर्ज थे। जिसमें हत्या के प्रयास और आगजनी से जुड़े आरोप थे।

सितंबर 2013 में हुए इन दंगों में कम से कम 62 लोग मारे गए थे। मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने मुजफ्फरनगर और शामली थानों में करीब 1,455 लोगों के खिलाफ 503 मामले दर्ज कराए थे। इनमे से कई लोग बीजेपी से जुड़े थे।

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