मुन्ना बजरंगी: 17 साल की उम्र में रखा था अपराध की दुनिया में कदम, 38 सालों में कर डाली 40 हत्याएं

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी (51) की सोमवार को बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसे रविवार देर रात को ही झांसी जेल से बागपत लाया गया था। यहां पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में कोर्ट में आज उसकी पेशी होनी थी। माफिया बजरंगी को उत्तराखंड के कुख्यात अपराधी सुनील राठी और विक्की सुनहेड़ा के साथ अलग बैरक में रखा गया था। उस पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 40 हत्याओं का आरोप था। बताया जाता है कि पूर्वांचल के लोग उसके नाम से ही डरकर कांप जाते थे।

पिता का सपना था मुन्ना बने सफल आदमी

डॉन मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था। उसका जन्म 1967 में यूपी के जौनपुर में हुआ था। मुन्ना को उसके पिता सफल आदमी बनाना चाहते थे। उसके पिता का सपना था कि मुन्ना पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने, लेकिन मुन्ना ने अपनी किस्मत में कुछ और बनना तय कर लिया था। बचपन में ही वह फिल्मों को बड़े ही गौर से देखता था, लेकिन फिल्म में हीरो की जगह उसे विलेन अधिक प्रभावित  करते थे। यहीं से उसने डॉन बनने का सपना देखा और पांचवी के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी और गैंगस्टर की दुनिया में जानें वाले शौक पाल लिए।

माफिया डॉन बनना चाहता था मुन्ना

बचपन से ही मुन्ना की एक ही ख्वाहिश थी कि वह बड़ा होकर फिल्मों की तरह माफिया डॉन बने। इसके लिए उसने हथियारों से दोस्ती शुरू कर दी। मुन्ना पर 17 साल की उम्र में ही पहला मुकदमा दर्ज हो गया था। उसके खिलाफ जौनपुर के सुरेही थाना क्षेत्र में मारपीट और अवैध हथियार रखने का केस दर्ज किया गया। पहले मुकदमे के बाद मुन्ना को जैसे अपराध का लाइसेंस मिल गया और उसने पीछे न मुड़ने की ठान ली और अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए उसने जौनपुर के ही एक स्थानीय दबंग गजराज सिंह का संरक्षण ले लिया। इसके बाद उसने अपने कारनामों से लोगों में दहशत का माहौल बना डाला। उस पर बीजेपी विधायक समेत 40 लोगों की हत्या करने का आरोप था।

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