शेल्टर होम यौन शोषण मामला, FIR दर्ज होते ही NGO को मिला एक और प्रोजेक्ट

पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में हुए घिनौने खुलासे के बाद देश में हडकंप मचा हुआ है। बालिका गृह को चलाने वाली एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति का घिनौना सच दुनिया के सामने आया लेकिन सरकार को इस इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस चौकाने वाले खुलासे के बाद भी इस समिति को एक और सरकारी प्रोजेक्ट आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है।

मुजफ्फरपुर

आपको बता टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) की टीम कशिश ने इस शेल्टर होम चल रहे घिनौने खेल की रिपोर्ट एक महीने पहले ही सौंप दी थी। इसके बाद भी स्टेट वेलफेयर डिपार्टमेंट (राज्य सामाजिक कल्याण विभाग) ने इस एनजीओ को एक महीने बाद ही एक सरकारी प्रोजेक्ट का ठेका दिया।

हैरानी की बात ये है कि जिस दिन इस एनजीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई उसी दिन इसे सरकारी प्रोजेक्ट मिला। एफआईआर में एनजीओ को चलाने वाले ब्रजेश ठाकुर समेत 11 लोगों का नाम है। इसमें कई लोगों की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है। आपको बता दें कि एनजीओ- सेवा संकल्प समिति द्वारा  मुजफ्फरपुर का यह गर्ल्स शेल्टर होम संचालित किया जाता है। हालांकि  मामला उछलने के बाद इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया। बता दें कि विभाग ने पटना में भिखारियों के लिए शेल्टर होम खोलने का प्रोजेक्ट सेवा संकल्प समिति को सौंपा था

दस्तावेजों के मुताबिक सामाजिक कल्याण विभाग के तहत आने वाली स्टेट सोसायटी फॉर अल्ट्रा पुअर और सोशल वेलफेयर के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी राज कुमार ने 31 मई को यह प्रजोक्ट सेवा संकल्प समिति को सौंपा था, लेकिन तीन दिन बाद ‘अपरिहार्य परिस्थितियों’ को कारन बताते हुए वापस ले लिया गया।

आपको बता दें कि सेवा संकल्प समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर पांच बालिका एवं महिला गृह चलाता है जिसके लिए उसे हार साल सरकार की तरफ से 1 करोड़ रुपए दिए जाते थे। उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में 34 बच्चियों के साथ बलात्कार का चौकाने वाला मामला सामने आया है। सीबीआई इस मामले की की जाँच कर रही है।

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