बीजेपी ने कहा- सोनिया के अधीन थी एनएसी नक्सलवाद समर्थक संस्था

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नई दिल्ली : बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को मुख्यधारा में ला खड़ा किया था। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को अपना नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (माओवादी) या माओवादी कांग्रेस पार्टी रख लेना चाहिए।

संबित पात्रा ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है और सिर्फ राजनीति अवसरवादिता के लिए इसके साथ खेलना कुछ ऐसा ही है, जैसा कांग्रेस हमेशा करती आई है। इस क्रम में हमारे पास कामरेड सुरंद्र को कामरेड प्रकाश द्वारा 25 सितंबर को लिखा गया एक दूसरा पत्र है, जिसमें मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का फोन नंबर है।”

उन्होंने कहा, “फोन नंबर के ही नहीं, पत्र में एक और बात लिखी हुई है, इसमें लिखा है ‘कांग्रेस के नेता इस प्रक्रिया में मदद के इच्छुक हैं और जब भी विरोध प्रदर्शन के मौके आएंगे, उसमें आर्थिक मदद के लिए भी सहमत हैं। इस संबंध में आप हमारे मित्र के नंबर से बात कर सकते हैं।” जिस मोबाइल नंबर का जिक्र है, वह राहुल गांधी के गुरु दिग्विजय सिंह का है। उन्होंने अभी तक इससे इंकार नहीं किया है कि यह उनका नंबर नहीं है।”

पात्रा ने कहा, “हम कह सकते हैं कि भ्रम, साजिश और कांग्रेस एक-दूसरे के समानार्थी हैं। उन्होंने नक्सलवाद पर हमेशा दोहरा रवैया अपनाया है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि नक्सलवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। लेकिन वहां कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने कांग्रेस के अंदर नक्सलवाद को रूमानी बनाया और इसका सबसे बड़ा उदाहरण तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के समीप रहने वाली मंडली ‘एनएसी’ है।”

उन्होंने कहा कि एनएसी सोनिया गांधी की दिमागी उपज थी और वास्तव में यह नक्सलवाद को समर्थन देने वाली जमीन थी। 2010 में देशद्रोह के लिए दोषी ठहराए गए बिनायक सेन को योजना आयोग और सर्वाधिक महत्वपूर्ण निकाय -स्वास्थ्य संबंधित संचालन समिति में शामिल किया गया था।

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पात्रा ने कहा, “यह कांग्रेस के अधीन नक्सलवाद को मुख्यधारा में शामिल करने की घटना थी। आखिर कांग्रेस को दोषी ठहराए गए नक्सलियों से प्यार क्यों है।”

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