नैनीताल में दिखने लगा Global Warming का असर

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नैनीताल। सेब की पैदावार के लिये प्रसिद्ध जिले के रामगढ़, बेतालघाट, भीमताल, धारी विकासखंड इस बार बर्फबारी के लिए तरस रहे हैं। फल पट्टी के तौर पर प्रसिद्ध इस क्षेत्र की फसलों पर ग्लोबल वॉर्मिंग का खासा असर दिख रहा है। बीते साल जनवरी के मुकाबले इस बार अधिकतम तापमान में पांच डिग्री बढ़ोतरी दर्ज हुई है। जिसकी वजह से सेब के पेड़ कमजोर पड़ रहे हैं। फसलों पर रोगों के हमले की आशंका भी बढ़ती दिख रही है। आर्द्रता और चिलिंग घटने के साथ-साथ सेब का रकबा भी घट रहा है। इन सब कारणों के चलते काश्तकार काफी मायूस हो रहे हैं।

 

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फल पट्टी में बर्फबारी पर नजर डालें तो 2010 में पहला हिमपात 31 दिसंबर को महज पांच इंच हुआ था। उसके बाद वर्ष 2011 में 16 फरवरी को भी इतना ही  हिमपात हुआ। 2012 में 13 दिसंबर को पहली बर्फबारी हुई थी, जबकि 2013 में 19 जनवरी को बर्फ गिरी। 2014 में 14 दिसंबर को पर्वतीय क्षेत्रों में काफी बर्फबारी हुई थी। उसके बाद जनवरी 2015 में हल्का हिमपात हुआ। वहीं इस बार दिसंबर बीतने के बाद भी अभी तक बर्फबारी तो दूर बारिश भी नहीं हुई है। किसानों को आशंका है कि जनवरी में भी बर्फबारी नहीं हुई तो उनकी सेब की फसल चौपट हो जाएगी।

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इसलिए भी जरूरी है बर्फबारी

वैज्ञानिकों और फल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में बर्फ नहीं पड़ती है तो सेब और अन्य फलदार वृक्षों समेत सब्जियों में रोग लगने की काफी आशंका है। पौधों का विकास तो रुकेगा ही, उनमे कीटों का हमला भी होगा, जिससे पैदावार को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। सेब में कैंकर रोग के साथ तना छेदक, बूली एफिड रोग भी लग सकता है।

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क्षेत्र में सेब के घटे रकबे पर नजर

उद्यान विभाग के सर्वे के मुताबिक जिले की फल पट्टी क्षेत्र में सेब के बगीचों का रकबा 6 हजार 580 हेक्टेयर घट गया है। सेब का उत्पादन भी 30 हजार मीट्रिक टन से घटकर महज 8 हजार मीट्रिक टन ही रह गया है।

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फल विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के बगीचों के खत्म होने के पीछे, ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद बढ़ते कंक्रीट के जंगल भी जिम्मेदार हैं। उनका ये भी कहना है कि सेब ठंडे इलाकों में अच्छा फल और गुणवत्ता वाला होता है। जितना अधिक ठंडा मौसम होगा, सेब की क्वालिटी और गुणवत्ता में उतना ही ज्यादा सुधार होगा। कई वैज्ञानिक मानते हैं कि सेब की अच्छी फसल तभी मिल सकती है, जब तापमान काफी कम हो। अगर समय पर बर्फबारी हो जाए तो सेब का ज्यादा और अच्छा उत्पादन होगा।

 

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