नारी निकेतन उत्पीडन मामला हाईकोर्ट पहुंचा 

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नैनीताल। राजधानी दून के नारी निकेतन में हुए संवासिनी के उत्पीडन का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में एक वकील ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। याची के तौर पर अधिवक्ता शिवांगी गंगवार ने हाईकोर्ट की निगरानी में जांच के लिए कमेटी गठित करने की मांग की है। इसके साथ ही नारी निकेतन में रह रही संवासिनियों की स्थिति में सुधार के लिए भी कदम उठाने को कहा है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से मार्च तक पूरे मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी।

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बता दें कि नारी निकेतन में दो संवासिनियों की मौत हो चुकी है और 23 संवासिनीयां विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। मौजूदा समय में नारी निकेतन में कुल 132 संवासिनियां रहती हैं, जिसमें 102 मानसिक रूप से बीमार हैं। इनकी सही तरीके से देखरेख नहीं हो पाती, जिसकी वजह से कई संवासिनियां कुपोषण का शिकार हो रही हैं। दून हॉस्पिटल के सीनियर फिजिशिएन का कहना है कि ज्यादा संवासिनियों में खून की कमी है, इसी वजह से वे कई दूसरी बीमारियों से भी ग्रसित हो रही हैं। कोर्ट के आदेश के बाद अधिकारी सकते में हैं, क्योंकि समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की देखरेख में ही नारी निकेतन का संचालन होता है।

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गौरतलब है कि दो संवासिनियों की मौत से पहले मूक बधिर संवासिनी से यौन शोषण का मामला सुर्खियों में रहा। यौन शोषण मामले में कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। साथ ही सीएम हरीश रावत ने संवासिनियों की बेहतरी के लिये कई कदम उठाने की घोषणा भी की। कोर्ट ने पूरे मामले में सुनवाई के बाद राज्य सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। जिसके बाद मार्च में पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई होगी और उम्मीद है कि संवासिनियों की बेहतरी के लिये कुछ नये कदम और उठाये जायें।

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