नासा ने की मदद, तब जाकर सुलझ पाई भारत की सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी

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नई दिल्ली। कहते हैं न कि चोर कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई गलती या सुराग अपने पीछे जरूर छोड़ जाता है। लेकिन इस बार खाकी ने भी ठान लिया था कि चोरों चाहे जितना भी शातिर क्यों न हो छोड़ेंगे नहीं। इसी के बदौलत पूरे 730 दिन बाद दो हजार लोगों से पूछताछ करने के बाद ट्रेन लूटने वाले चोर पुलिस के हत्थे चढ़ गए।हालांकि, यह सब मुमकिन हो पाया जब भारत ने लिया ब्रह्मास्त्र(अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा) का सहारा लिया। आपको बता दें कि 8 अगस्त 2016 को तमिलनाडु के सेलम से चेन्नई जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में 342 करोड़ रुपये ले जाए जा रहे थे। पैसों की हिफाजत के लिए बोगी में हथिय़ारों से लैस 18 पुलिस वाले भी मौजूद थे।

मगर फिर भी ट्रेन में डाका पड़ गया और ट्रेन में 5.78 करोड़ रुपये की लूट हो गई। अब दो साल बाद पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए दावा किया है कि द ग्रेट ट्रेन रॉबरी के केस को सुलझा लिया गया है।

नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे चोर-
नासा की मदद से घटनास्थल की सैटेलाइट तस्वीरें मंगवाई गई। तब पता चला कि सेलम से विरधाचलम के बीच की इस ट्रेन रॉबरी को 11 लोगों ने मिल कर अंजाम दिया था। पुलिस की सीआइडी शाखा ने नासा की इन तस्वीरों को देखा और उसके आधार पर चोरों की तलाश शुरू की।

जांच में पता चला कि डकैत मध्यप्रदेश और बिहार के थे। इस बीच संदिग्धों से भी पूछताछ की गई है।  इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि लुटेरों का यह गैंग उत्तर भारत में हुए कई अपराधों में भी शामिल रहा है। पुलिस ने दावा किया है कि लूटेरों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।सबसे पहले आईटी एक्सपर्ट ने दिया था सुराग-
सब तरह का दांव-पेंच अपनाने के बाद आखिर में स्पेशन सेल ने मामले को सुलझाने के लिए आईटी एक्सपर्ट्स की मदद ली। तब टीम के हाथ लगा था पहला सुराग।

स्पेशल सेल ने सेलम से चेन्नई के बीच ट्रेन चलते वक्त जितने भी मोबाइल नंबर एक्टिव मिले उनको खंगालने पर मिला कि उनमें से चार-पांच संदिग्ध हैं। उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों में कुछ समानता पाई गई। जब इन नंबरों की जांच की गई तो पता चला कि ये सभी नंबर मध्य प्रदेश की एक ही जगह के हैं।

ट्रेन की छत काटकर हुई थी लूट-
चेन्नई पहुंचने से पहले शायद ट्रेन में पड़ चुके इस डाका का खुलासा भी ना होता। अगर एग्नोर रेलवे स्टेशन पर पुलिसवालों ने बोगी का दरवाजा खोल कर यूंही अंदर का मुआयना न किया होता। उसी दौरान एक अफसर ने देखा कि रात के अंधेरे में भी बोगी के अंदर बाहर से रोशनी आ रही है।

इसी के बाद जब एक रेलवे कर्मचारी को बोगी की छत पर भेजा गया तो पता चला कि छत में सेंध मारी जा चुकी है। गौरतलब है कि दो साल पहले ट्रेन लूट की यह घटना तब हुई जब ट्रेन सलेम और वृंदाचलम स्टेशनों के बीच सिग्नल मिलने का इंतजार कर रही थी। इसी का लुटेरों ने फायदा उठाया और ट्रेन की छत काटकर आरबीआइ के 5.78 करोड़ रुपए उड़ा ले गए।

 

 

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