नासा : छोटा होता जा रहा है ओजोन परत का छेद

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वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक खुशखबरी दी है। नासा ने कहा कि सीएफसी पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगने से ओजोन परत के क्षरण में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है। पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के लिए रक्षाकवच के तौर पर काम करने वाली ओजोन लेयर का छेद छोटा होता जा रहा है। स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोखकर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है।

सीएफसी लंबे समय तक टिके रहने वाले ऐसे रासायनिक तत्व हैं जो अपने आप समतापमंडल में बनते हैं, वहां वे सूर्य की पराबैंगनी किरणों से टूट जाते हैं। इससे क्लोरीन के परमाणु उत्पन्न होते हैं जो ओजोन के अणुओं को क्षति पहुंचाते हैं। पराबैंगनी किरणों के पृथ्वी तक पहुंचने से कैंसर और मोतियाबिंद हो सकता है, रोग प्रतिरोधी क्षमता पर असर पड़ सकता है और पौधों के जीवन को नुकसान पहुंच सकता है।

नासा ने कहा, हमने पाया कि ओजोन छिद्र में सीएफसी से क्लोरीन की मात्रा कम हो रही है और इसके कारण ओजोन परत का कम क्षरण हो रहा है। यह पता लगाने के लिए कि ओजोन और अन्य रसायन कैसे साल दर साल बदल रहे हैं, वैज्ञानिकों ने पाया कि ओजोन परत का क्षरण कम हो रहा है।

इस साल ओजोन छेद में इस परिवर्तन के पीछे वैज्ञानिक अंटार्कटिक भंवर की अस्थिरता व ज्यादा गर्मी, जोकि अंटार्कटिक क्षेत्र के वायुमंडल में दक्षिणावर्त बनने वाले समतापमंडलीय निम्न दबाव के कारण उत्पन्न होती है, को मानते हैं। इसस पहले साल 2016 में ओजोन छेद सबसे बड़ा 89 लाख वर्गमील का पाया गया था।

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