स्टार्टअप के खातिर SEBI ने इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म में किये नैस्डेक जैसे चेंजेस

बेंगलुरु : अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज नैस्डेक ने ही आज गूगल, फेसबुक, एपल, एमेजॉन और नेटफ्लिक्स जैसे टेक स्टार्टअप कंपनियों को इस मुकाम पर पहुंचाया है। इसी कड़ी में मार्किट रेगुलेटर SEBI भी भारत में ऐसा कुछ करना चाहता है ताकि भारत की स्टार्टअप्स को भी बेहतर किया जा सके।

क्यूंकि इस तरह के इंडेक्स में लिस्ट होने से कम्पनी को फण्ड जुटाने में बड़ी मदद मिलती है। भारत की कुछ स्टार्टअप्स जैसे मेक माय ट्रिप और यात्र.कॉम नैस्डेक में लिस्टेड हैं और इस से इन कम्पनीज़ को मार्केट से फंड जुटाने में बड़ी आसानी हुई है।

SEBI के इस कदम से फंडिंग होगी आसान

भारत में कई स्टार्टअप कंपनियां IPO लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इनमें ज़ोमाटो, डेलीवेरी और नायका काफी मशहूर हैं। इन कंपनीज को बढ़ावा देने के वास्ते सेबी ने अब इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म को आसान बनाकर नैस्डेक की तरह कर दिया है।

इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म में हुए हैं बड़े बदलाव

SEBI  ने मौजूदा  प्री-इश्यू होल्डिंग पीरियड को 2 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया। इस कदम से स्टार्टअप कंपनियों को फंडिंग में सहूलियत होगी। यह सुविधा भारत में अभी तक सिर्फ BSE और NSE में लिस्टेड कंपनियों के पास ही थी। सेबी के नए रूल्स के मुताबिक, IPO लाने वाली कंपनी इश्यू साइज का 60 परसेंट तक इन्वेस्टर को अलॉट कर सकती है। अभी तक स्टार्टअप कंपनियों को इस तरह के अलॉटमेंट की परमिशन नहीं थी। इसी के साथ अब इन्वेस्टर की प्री-इश्यू शेयरहोल्डिंग को प्री-इश्यू कैपिटल का 25 % कर दिया गया है। जोकि पहले सिर्फ 10 % था।

हाल ही में जारी किये अपने बयान में सेबी ने कहा की जो स्टार्टअप्स मुनाफे में नहीं हैं और अगर उनकी 50%से ज्यादा हिस्सेदारी क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के पास है तो वह भी स्टॉक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में शामिल हो सकते हैं। इनोवेटर ग्रोथ प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कंपनी के टेकओवर के लिए मौजूदा 25 % के बजाय अब 49 % का ओपन ऑफर लाना होगा।

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