राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी बढ़ते पलायन से है परेशान, राज्य सरकार को जमकर लगाई फटकार

0

देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते पलायन से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी काफी चिंतित है। साथ ही राज्य में बढ़ते पलायन का जिम्मेदार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को ठहराया है। दरअसल, राज्य के पहाड़ी इलाकों में जनता को पढ़ाई, मेडिकल सेवाएं जैसी बेसिक जरूरते भी ढंक से नहीं मिल रही हैं। यही वजह है कि लोग इन इलाकों से जा रहे हैं। इस मामले में आयोग का कहना है कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जनता तक पहुंचाने में नाकामयाब रही है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पेश किए आकड़े

हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दो दिवसीय समारोह हुआ। इस समारोह में आयोग के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है, लेकिन जनता तक इन सुविधाओं को पहुंचाने में सरकार नाकाम रही हैं।

इस मामले में आयोग ने सरकार को फटकार भी लगाई और कहा कि जब तक वो जनता को उनकी मूलभूत जरूरतों को उनतक नहीं पहुंचाएंगे तब तक प्रदेश से पलायन की समस्या खत्म नहीं होगी। साथ ही आयोग ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की जबरदस्त कमी है। इससे आमजन को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इस दिशा में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में कोई प्रगति न होने पर भी निराशा व्यक्त की। कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी शासन को नोटिस जारी किया जा चुका है। आयोग ने अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश देते हुए प्रगति रिपोर्ट भी सौंपने को कहा।

यह भी पढ़ें : राष्ट्रपति चुनाव : उत्तराखंड करेगा मीरा कुमार को निराश, खाते में आएंगे मात्र 27 फीसदी वोट

इसके साथ ही आयोग ने कुछ चौंकाने आकड़े भी पेश किए हैं। इन आकड़ों से साफ़ पता चल रहा है कि जब से उत्तराखंड अलग राज्य बना है तब से अब तक प्रदेश के कुल 16793 गांवों में से तीन हजार गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर खली कर दिए हैं, इससे ये साफ़ पता चल रहा है कि राज्य सरकार जनता की बेसिक जरूरते पूरी नहीं कर पा रही है।

loading...
शेयर करें