नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे: भारत में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा जानकर आप रह जायेंगे दंग

नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे का महत्व और हर घर से निकलने वाले कचरे का अनुपात

भोपाल: भोपाल में हुई भयानक गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के कारण हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने से ‘जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट गैस’ का रिसाव हुआ था। जिसके कारण अधिकांश संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। जिन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ‘नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे’ मनाया जाता है।

क्यों मनाते है नेशनल पॉल्यूशन डे?

मध्य प्रदेश के दिल भोपाल में 3 दिसम्बर सन् 1984 को दिल को दहला देने वाली एक भयानक गैस त्रासदी हुई थी। ‘यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी’ के कारखाने से एक जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट गैस’ का रिसाव हुआ था जिसके कारण लगभग 15000 से अधिक लोगों ने इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाई थी। इस गैस त्रासदी के कारण बहुत सारे लोग कई तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन का शिकार हुए थे। उन्हीं लोगों की याद में सम्मान देने के लिए भारत में हर साल यह दिन ‘नेशनल पॉल्यूशन डे’ के रूप में  मनाया जाता है।

त्रासदी का असर नवजात बच्चों पर

भोपाल गैस काण्ड में (MIC)  मिथाइल आइसोसाइनाइट नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता था। इसका असर वहां आज भी देखने को मिलता है, बच्चे विकलांग पैदा हो जाते है या जन्म लेने के बाद उनमें कोई न कोई बीमारी अवश्य होती है। भोपाल गैस त्रासदी विश्व की सबसे बड़ी ‘औद्योगिक त्रासदी’ थी। ऐसी घटना दोबारा ना हो इसलिए ‘राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस’ के माध्यम से लोगों को जागरुक किया जाता है।

1,50,000 टन कचरा प्रतिदिन

भारत में एक दिन में 1,50,000 टन कचरा हर रोज निकलता है। जिसमें से कूड़े का एक तिहाई भाग सिर्फ महाराष्ट्र से ही निकलता है जबकि एक घर से 450 ग्राम कचरा हर रोज निकलता है। 1,50,000 टन कचरे में से 1,35,000 टन कचरे को इकट्ठा किया जाता है जिसमें से 27,000 टन कचरा (वेस्ट) होता है जिसे फेंक दिया जाता है और बाकि बचे 80% कचरों का डंपिंग किया जाता है। पूरे भारत में कचरों का डंपिंग दिल्ली के भलस्वा, गाजीपुर और ओखला में किया जाता है। जहां पर कचरों को डंप किया जाता है।

100 शहरों में कम होगा प्रदूषण

भारत सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के खिलाफ युद्घ छेड़ा है। सरकार का दावा है कि 100 शहरों में 5 साल में कम होगा प्रदूषण। पीएम मोदी ने कहा कि चुने हुए 100 शहरों में प्रदूषण कम करने की दिशा में एक जनभागीदारी के साथ ‘आधुनिक टेक्नोलॉजी’ का उपयोग भरपूर करते हुए प्रदूषण कम करने की दिशा में एक मिशन मोड़ में काम करने वाले है।

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