देश के कई हिस्सों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मनाया गया Navroz 

भुज : पारसी नव वर्ष जिसे Navroz के नाम से भी जाना जाता है देश में बेहद शांति से मनाया गया। इस कड़ी में आपकी जानकारी के लिए बता दें की यह एक ईरानी त्यौहार है जिस की शुरुआत ईरानी पैगंबर जोरोस्टर ने की थी। आमतौर पर 21 मार्च के आसपास मनाया जाने वाले इस त्यौहार को भारत में यह जुलाई या अगस्त के महीने में मनाया जाता है। इसकी वजह है शहंशाही कैलेंडर जिसके मुताबिक इस साल यह दिन 16 अगस्त को मनाया गया।

नए साल के पहले दिन को कहते हैं Navroz

इस दौरान पारसी समुदाय के लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं। और हर कोई एक दूसरे को ढेर सारे तोहफे देता है। समझने के लिए इसे आप पारसी समुदाय का क्रिस्टमस कह सकते हैं। इस दौरान समुदाय अपने घर को पारंपरिक रूप से सजाते हैं, घरों में स्वादिष्ट पारसी व्यंजन तैयार किये जाते हैं। यह दिन ईरानी कैलेंडर की शुरुआत का प्रतीक है और यह प्रसिद्ध फ़ारसी राजा जमशेदी नवरोज़ पर भी आधारित है, जिन्होंने पारसी कैलेंडर में सौर गणना की शुरुआत की थी। भारत में, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य इस दिन को क्षेत्रीय अवकाश के रूप में मनाते हैं। चूंकि दोनों राज्यों में पारसी आबादी का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत है।

यह भी पढ़ें : Tokyo में 24 अगस्त से पैरालंपिक शुरू होने जा रहा है, PM Modi कल देंगे जीत का मंत्र

 

 

Related Articles