न बात… न मुलाकात… अब सीधे आतंकियों पर होगी गोलियों की बरसात

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नई दिल्ली। दिन पर दिन बढ़ते आतंकवाद को लेकर अब कश्मीर में मोदी सरकार सख्त तेवर अपनाने के मूड में है। बीजेपी नेतृत्व को महसूस हो रहा है कि घाटी में फिलहाल बातचीत की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। 10 जुलाई को अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद केंद्र सरकार सीमा पर सख्ती दिखाने में लगी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के बाद आतंकियों को सख्ती से जवाब दिए जाने की जरूरत है।

मोदी सरकार

मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है

वही, संबंधित मामले में विपक्षी नेताओं का कहना है कि मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आतंकियों के खिलाफ बातचीत के माध्यम से मुद्दे को सुलझाया जाए लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बीजेपी आतंकियों के खिलाफ सिर्फ बातचीत पर ही निर्भर नहीं रह सकती है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को ऐसा लगता है कि आतंकियों के खिलाप अब सख्त कदम उठाने का वक्त आ गया है।

बुरहान वानी की मौत के बाद से बढ़ा है तनाव

पार्टी को साफ तौर पर यह महसूस हो रहा है कि जो विपक्षी नेता बातचीत की मांग कर रहे हैं, उन्हें शायद जम्मू-कश्मीर के जमीनी हालात का अंदाजा नहीं। पार्टी को यह भी लगता है कि विपक्ष और अलगाववादी नेता इस फिराक में हैं कि किसी तरह इस मुद्दे पर केंद्र की कमजोरी सामने आ जाए। साथ ही उनकी कोशिश है कि प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की कमजोर नब्ज पर हाथ रखा जाए। गौरतलब करने वाली बात है कि पिछले साल मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही घाटी में हिंसा का दौर काफी बढ़ गया था। बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में लगातार आतंकियों ने माहौल खराब कर रखा है।

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