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SC द्वारा गठित समिति के सदस्य सरकार समर्थक, आंदोलन जारी रखेंगे किसान संगठन

नई दिल्ली : केंद्र सरकार (central government) द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानून (New agricultural laws) को लेकर जारी गतिरोध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के आ जाने के बाद भी मामला ख़त्म होता नहीं दिख रहा है। किसान संगठनों (Farmer organizations) ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को मानने से इनकार कर दिया। किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित यह समिति सरकार समर्थक है। इस समिति पर हमें विश्वास नहीं है।

दिल्ली में सिंधु बॉर्डर (Indus border) पर नए कृषि कानून के विरोध में धरना दे रहे किसानों ने संवादाता सम्मलेन में कहा कि शीर्ष अदालत (Supreme court) द्वारा गठित यह समिति मोदी सरकार (Modi government) की समर्थक है, इसके समक्ष किसान प्रस्तुत नहीं होंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल (Balbir Singh Rajewal) ने कहा कि यह समिति इस बिल के समर्थन में लिखित में सरकार को अपना समर्थन दे चुकी है। किसान नेताओं ने कहा कि हमने कभी ये मांग नहीं की शीर्ष अदालत इस बिल को लेकर समिति बनाए, उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार (Modi government) की नई चाल है। किसानों ने कहा कि संसद (Parliament) को इस मसले पर चर्चा करके समाधान करना चाहिए। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर इस कानून को वापस ले सकता है, लेकिन हमें कोई भी समिति मंजूर नहीं है। हालांकि किसानों ने कहा है कि वह 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे।

चार सदस्यीय समिति में ये हैं शामिल

बता दें कि इससे पहले नए कृषि कानून (New agricultural laws) को लेकर जारी गतिरोध को ख़त्म करने के लिए न्यायलय ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया है और अगले आदेश तक इस बिल को लागू करने से रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति में कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, बीकेयू के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, श्वेतकारी संगठन के अध्यक्ष्य अनिल घनावत और IFPRI के दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी शामिल है।

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